Kapas Ki Kheti | कपास की खेती कैसे करें | कपास के पौधों में लगाने वाले रोग

Written by Priyanshi Rao

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Kapas Ki Kheti: भारत में बहुत अधिक मात्रा में Kapas Ki Kheti की जाती है। कपास की खेती किसानो के लिए बहुत फायदेमंद होती है क्योंकि इसमें मुनाफा बहुत अधिक होता है। कपास की कई तरफ की खेती भारत में की जाती है। किसान कपास की खेती को नगद खेती के रूप में देखते है क्योंकि ये खेती किसानो की आर्थिक स्थिति को मजबूत करती है।

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आज के इस आर्टिकल में हम आपको Kapas Ki Kheti के बारे में पूरी जानकारी देने वाले है। आपको इस आर्टिकल में बताएँगे की Kapas Ki Kheti कैसे करते है। Kapas Ki Kheti के लिए खेत की तयारी कैसे करे। कपास में खरपतवार नियंत्रण कैसे करें। कपास में लगने वाले रोग कौनकौन से होते है और उनकी रोकथाम कैसे करें आदि सभी मुद्दों पर आपको बताएँगे।

कपास की खेती कैसे करें – Kapas Ki Kheti Kaise Kare

Kapas Ki Kheti में फल दो भागों में इस्तेमाल होता है। इसमें जो रेशे निकलते है उससे कॉटन बनाकर कपडे बनाने में इस्तेमाल किया जाता है और इसके जो बीज होते है उनको पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल किये जाते है। किसानो को Kapas Ki Kheti करने में बहुत मेहनत करनी होती है तब जाकर कपास की खेती होती है।

सिचाईं के नजरिये से अगर देखा जाए तो इसमें अधिक पानी की अधिक जरुरत नहीं होती। Kapas Ki Kheti के पुरे देश में की जाती है क्योंकि कपास की खेती के लिए किसी विशेष जलवायु की जरुरत नहीं होती। कपास हर तरह की जलवायु में पैदा होती जाती है।

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Kapas Ki Kheti करने के लिए मिटटी का pH लेवल 6 के आसपास होना चाहिए। Kapas Ki Kheti मैदानी और पहाड़ी दोनों तरह के इलाके में अच्छी पैदावार देती है। लेकिन इसके अलावा अगर कपास के लिए सबसे बढ़िया मिटटी की बात करें तो कपास काली और दोमट मिटटी में सबसे अच्छी होती है।

कपास की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु – Kapas Ki Kheti Ke Liye Upyukt Jalvayu

जैसा की हमने आपको ऊपर बताया की Kapas Ki Kheti हर तरफ की जलवायु में उगाई जा सकती है। कपास की खेती एक ऐसी फसल होती है जो गर्मियों में बोई जाती है और फिर बारिश के बाद सर्दियों तक चलती है। सामान्य तौर पर कपास की खेती में जब इसकी बुआई की जाती है उस समय तापमान 20 डिग्र्री के आसपास होना सही माना जाता है। इस तापमान में बीज सही से अंकुरित होते है।

जैसे जैसे कपास के पौधे बढ़ने लगते है तो तापमान 30 डिग्री के आपपास एक दम सही होता है। इससे अधिक तापमान में पौधों में सही प्रकार से वृद्धि नहीं हो पाती। हालाँकि जिस समय कपास के पौधों में टिंडे आने लगते है उस समय कपास के टिन्डो को फूलने के लिए थोड़ी गर्मी की जरुरत होती है। लेकिन देश के कई हिस्सों में सर्दी के मौसम के कारण कपास में नुकसान भी होता है।

कपास की खेती के लिए खेत की तैयारी कैसे करें? – How to prepare the field for cotton cultivation?

Kapas Ki Kheti करने के लिए सबसे पहले आपको खेत की एक बार जुताई करनी चाहिए और उसमे गोबर की खाद डालनी चाहिए। गोबर की खाद डालने के बाद एक बार फिर से जुताई करें ताकि खाद अच्छे से मिटटी में मिक्स हो जाये। इस दो दिन बाद खेत में एक बार हल्का पानी लगा देना चाहिए। इसके बाद 4 से 5 दिन के लिए खेत को छोड़ दें। इस दौरान खेत में खरपतवार के बीज भी अंकुरित हो जायेंगे और बाद में आपकी फसल को नुकसान नहीं करेंगे।

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इसके बाद खेत की दो बार अच्छे से जुताई करनी चाहिए। आखिर में खेत में उर्वरकों की बुवाई करके खेत को समतल कर दें। उर्वरकों की बुवाई के समय हल के पीछे पाटे का इस्तेमाल जरूरर करें ताकि खेत पूरी तरफ से समतल हो जाये। खेत समतल होने से आगे चलकर खेत में पानी का भराव नहीं होगा। ये सब करने के दो दिन बाद आपको खेत में कपास के बीजों की बुवाई करनी है। दो दिन में उर्वरक मिटटी में अच्छे से मिल जायेंगे और बीजों कोठीक से अंकुरित होने में मदद करेंगे।

कपास की खेती के लिए बुवाई कैसे करें? – How to sow for cotton cultivation?

Kapas Ki Kheti में बुवाई के समय सबसे जरुरी होता है पौधे से पौधे की दूरी कितनी रखनी है। क्योंकि अगर आप नजदीक में बीजों की बुवाई करेंगे तो पौधों को फैलने में मदद नहीं मिलेगी। कपास के बीज बौने से पहले आपको उन बीजों को इमिडाक्लोप्रीड नामक दवाई से उपचारित जरूर करें। बीजों को उपचारित करने के बाद जमीन में लगने वाले रोगों से बचाव करने में मदद मिलती है।

इसके बाद बीजो किबुवै करनी है। एक बीज से दूसरे बीज की दुरी आपको दोनों तरफ से लगभग 50 सेंटीमीटर तक रखनी है। यानि की पौधे से पौधे की दुरी लाइन में और एक लाइन से दूसरी लाइन तक बराबर बराबर रखें। बीजों को बुवाई के समय 2 सेंटीमीटर की गहराई में डालें। इससे अधिक गहराई में बीज डालने से उनको बहार niklne में अधिक समय लगेगा और कुछ बीज बहार नहीं निकल पाते।

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कपास का पौधा काफी फैलाव करता है इसलिए पौधे से पौधे की दुरी अधिक होती है। और दुरी अधिक होने के कारण एक एकड़ में लगभग 450 ग्राम बीजों में ही अच्छे से बुवाई हो जाती है।

कपास की उन्नत किस्मे कौन कौन सी है? – Which are the improved varieties of cotton? 

भारत में कपास की कई तरह की किस्मो की खेती की जाती है। ऐसे में हम आपको पुरे भारत में कपास की कौन कौन सी किस्मे बोई जाती है उनके बारे में जानकारी दे देते है। देखिये कपास की उन्नत किस्मे कौन कौन सी है।

  • RCH 773 कपास की किस्म
  • RCH 776 कपास की किस्म
  • US 51 कपास की किस्म
  • US 71 कपास की किस्म
  • Surpass कपास की किस्म
  • Ajeet-199 BGII कपास की किस्म
  • Money Maker कपास की किस्म
  • Surpass 7272 BGII कपास की किस्म

ये है भारत में बोई जाने वाली कपास की सबसे उन्नत किस्मे। इन सभी किस्मो की बुवाई का समय अप्रैल और मई का महीना होता है। इस दौरान कपास की बुवाई कर देनी चाहिए। अधिक देरी से की गई कपास की खेती में रोगों के लगने की सम्भावना बढ़ जाती है।

कपास की खेती में लगने वाले रोग और उनकी रोकथाम – Diseases and their prevention in cotton cultivation

Kapas Ki Kheti में कई तरह के रोग लगते है। अगर उनका सही समय पर उपचार नहीं किया जाये तो पूरी फसल ही बर्बाद हो जाती है। ऐसे में आपको निचे दिए गए कपास की खेती में लगने वाले रोगों के बारे में जरूर जानना चाहिए। कपास की खेती में लगने वाले प्रमुख रोग इस प्रकार से है।

कपास में होने वाला जड़ गलन रोग – Cotton Root Rot

Kapas Ki Kheti में जड़ गलन रोग दोनों तरह की किस्मो में होता है। इस रोग के लगने के बाद कपास के पौधे सूखने लगते है। ये रोग ज्यादातर मिटटी से पैदा होने वाली राइजोक्टोनिया नामक फफूंद के कारण होता है। इस रोग के लगने के कुछ दिन बाद ही कपास का पौधा पूरी तरफ से सूख जाता है।

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इस रोग के कारण पौधे की छाल पूरी तरफ से गल जाती है लेकिन पौधे को देखकर ऐसा लगेगा की इसमें नमी बनी हुई है। जड़ गलन रोग से ग्रसित पौधे की पत्तियां पौधे के सूखने के बाद भी झड़ती नहीं है। ये रोग कपास की खेती में लगने वाला सबसे जयादा और सबसे भयानक रोग है। इसके कारण भारत में सबसे ज्यादा फसलें ख़राब होती है। इस रोग से बचाव करने के लिए बुवाई के समय ही बीजों को सही से उपचारित करें। इसके अलावा आप बीजों को Carboxin 70 की 0.2% मात्रा के साथ भी उपचारित कर सकते है जिससे जड़ गलन रोग की सम्भावना को खरं किया जा सकता है।

कपास में लगने वाला झुलसा (आल्टरनेरिया पत्ती धब्बा) रोग – Cotton blight (Alternaria leaf spot) disease

Kapas Ki Kheti में झुलसा रोग को सबसे खतरनाक माना जाता है। झुलसा रोग कपास के पत्ते और टिंडे पर काले रंग के छोटे छोटे धब्बे बन जाते है और इससे टिंडे बिना पके ही खिलने लगते है। कच्चे टिंडों के खिलने के कारण कपास में बनने वाले रेशे ख़राब हो जाते है जिसका सीधा सीधा असर कपास की पैदावार और क्वालिटी पर पड़ता है। इस रोग के कारण सभी पौधों के पत्ते भी गिरने लगते है जिससे पौधे पूरी तरफ से बढ़ नहीं पाते।

कपास को झुलसा (आल्टरनेरिया पत्ती धब्बा) रोग से बचाने के लिए कपास के खेत में समय समय पर काँपर ऑक्सीक्लोराइड नामक दवा के घोल का छिड़काव जरूर करना चाहिए। इससे झुलसा (आल्टरनेरिया पत्ती धब्बा) रोग को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है।

कपास की फसल में लगने वाला अंगमारी रोग – Cotton Blight

ये रोग मुख्य रूप से उत्तर भारत में कपास की फसल को नुकसान पहुंचाता है। इस रोग के कारण कपास के पत्तों और टिन्डो पर त्रिकोणीय रूप में भूरे रंग के धब्बे बनने लगते है जो समय के साथ साथ काले रंग में परिवर्तित होने लगते है। ये रोग पत्तियों से शुरू होकर पुरे पौधे में फ़ैल जाता है। इस रोग के लगने के बाद कपास के टिंडे पूरी तरह से ख़राब हो जाते है। टिन्डो से पानी जैसा पदार्थ निकलने लगता है जिससे टिंडा पूरी तरह से सड़कर ख़राब हो जाता है।

Kapas Ki Kheti को अंगमारी रोग से बचाने के लिए एन्ट्राकाल नामक दवाई के घुल का छिड़काव करना चाहिए। इससे रोग को रोकने में काफी मदद मिलती है।

कपास की खेती में खरपतवार नियंत्रण कैसे करें? – How to control weeds in cotton cultivation?

Kapas Ki Kheti में खरपतवार नियंत्रण करना बहुत ही जरुरी होता है। कपास की बुआई के समय ही बहुत से खरपतवार साथ में ही उग जाते है। अगर उनको सही समय पर नहीं निकला जाए तो ये कपास के पौधे को बढ़ने नहीं देती। इसलिए खेत में कपास की बिजाई के 1 महीने बाद से ही खेत में निराई गुड़ाई का काम शुरू कर देना चाहिए। एक बार सही से निराई गुड़ाई होने के बाद आगे चलकर खरपतवार फसल को नुकसान नहीं पहुंचा पाता।

खरपतवार ने साथ में बहुत से रोग भी उत्पन्न होते है जो आपकी कपास की फसल को नुकसान पहुंचा सकते है इसलिए उनको खेत से हटाना बहुत जरुरी होता है। खेत में पहली निराई गुड़ाई कपास की बुवाई के 20 से 25 दिन मेंशुरुकार देना चाहिए और दूसरी निराई गुड़ाई इसके 30 दिन के अंतराल पर करनी चाहिए।

कपास की बिजाई के तुरंत बाद खेत में स्टाम्प का घोल छिड़कना चाहिए। स्टाम्प को प्रति लीटर 1 मिलिटर के हिसाब से मिलकर छिड़काव करने से चौड़ी पट्टी के खरपतवारों पर आसानी से नियंत्रण किया जा सकता है। इसके अलावा कपास के खेत में उगने वाली गाजर घास पर भी नियंत्रण करना बहुत जरुरी होता है। गाजर घास की रोकथाम के लिए कपास के खेत में एट्राजिन की 800 ग्राम प्रति एकड़ की मात्रा का छिड़काव करना चाहिए।

कपास की फसल में सिंचाई करने का सही तरीका क्या है? – What is the correct method of irrigation in cotton crop?

हालांकि देश के बहुत से हिस्से ऐसे भी है जहाँ पर कपास की फसल की बुवाई के समय बारिश भी आ जाती है। इसलिए उन इलाकों में पहली सिंचाई करने की जरुरत नहीं होती। यदि आपके इलाके में बारिश नहीं आती है तो कपास की फसल की बुवाई के 35 से 40 दिन के बाद पहली सिंचाई कर देनी चाहिए।

कपास की फसल में ये ध्यान रखना की इसमें पानी की मात्रा सिंचाई के समय अधिक ना हो जाये क्योंकि ये कपास की फसल के लिए बहुत हानिकारक होता है। बुवाई के समय आपको पानी की निकासी का पूरा पूरा ध्यान रखना है। पहली सिंचाई पूरी होने के बाद दूसरी सिंचाई तभी करें जब आपको लगता है की खेत में नमी काम हो गई है।

जब कपास के खेत में फूल आने लगे और टिंडे भी बनने लगे तब आपको हर 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई जरूर करनी चाहिए। इससे आपकी कपास की फसल में फूल भी अच्छे से आएंगे और टिंडों का साइज बहुत पूरी तरह से विकसित होकर बड़ा हो जायेगा।

कपास की खेती में तुड़ाई का सही समय क्या है? – What is the right time of harvesting in cotton cultivation?

Kapas Ki Kheti में तुड़ाई का सही समय देश के अलग अलग हिस्सों में भिन्न भिन्न होती है। ये जलवायु पर निर्भर होती है। कपास की तौड़ै तभ करें जब आपको लगता है की टिंडा 60 से 70 प्रतिशत तक खिल चुके हों।

उत्तर भारत के अंदर कपास की तुड़ाई का समय अक्टूबर का महीना बिलकुल सही होता है। अक्टूबर में उत्तर भारत में कपास के टिंडे 50 से 60 प्रतिशत तक खिल जाते हैं। अगर तुड़ाई सही समय पर नहीं की जाए तो कपास के टिंडे पूरी तरफ से खिलकर रेशे बहार की तरफ गिरने लगते है जिससे पत्तों का चूरा उनमे मिक्स होने के चांस बढ़ जाते है।

कपास की खेती के लिए पूछे जाने वाले प्रशन्न और उनके उत्तर – Frequently Asked Questions and Answers for Cotton Farming

प्रशन्न: कपास बोने का सही समय क्या है? – What is the right time to sow cotton?
उत्तर: कपास की बुवाई का सही समय मई महीना होता है। अगर बारिश ना हो तो सिचाई ठीक से करने के बाद ही कपास को बुवाई करनी चाहिए।

प्रशन्न: 1 एकड़ में कपास कितना होता है? – How much is cotton in 1 acre?
उत्तर: 1 एकड़ खेत में लगभग 28 से 30 क्विंटल कपास की पैदावार होती है।

प्रशन्न: कपास में कौन सी खाद डालनी चाहिए? – Which fertilizer should be applied in cotton?
उत्तर: कपास की बुवाई से पहले खेत में गोबर की खाद डालनी चाहिए। इसके अलावा खेत में 50 किलो यूरिया, 10 किलोग्राम जंक सल्फेट, 40 किलो म्यूट्रेट पोटाश और सुपर फास्फेट की 150 किलोग्राम की मात्रा भी खेत में डालनी चाहिए। इसके अलावा जब कपास के खेत में फूल आने लगे तब प्रति एकड़ एक बोरी यूरिया का भी छिड़काव करना चाहिए।

प्रशन्न: कपास कितने दिनों में तैयार हो जाता है? – In how many days the cotton gets ready?
उत्तर: कपास की खेती को तैयार होने में लगभग 210 से 230 दिनों का समय लग जाता है।

प्रशन्न: कपास का बीज रेट कितना है? – How much is the seed rate of cotton?
उत्तर: कपास का बीज का रेट अलग अलग ब्रांड के हिसाब से अलग अलग होता है। कपास के बीज का एक पैकेट लगभग 850 रूपए में बाजार में मिलता है।

प्रशन्न: कपास के लिए कौन सी भूमि सबसे अच्छी है? – Which land is best for cotton?
उत्तर: काली मिटटी और दोमट मिटटी कपास की फसल के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है।

प्रशन्न: कपास के लिए कैसे मिट्टी चाहिए? – What kind of soil is needed for cotton?
उत्तर: काली मिटटी और दोमट मिटटी कपास के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है। बुवाई से पहले मिटटी की जुताई करके भुरभुरी करनी चाहिए।

प्रशन्न: कपास में पहला छिड़काव कौन सा करें? – Which should be the first spray in cotton?
उत्तर: कपास के खेत में निम्बीसीडीन 300 पीपीएम का छिड़काव करना चाहिए।

प्रशन्न: कपास में खाद कैसे डालें? – How to fertilize cotton?
उत्तर: कपास के खेत में खाद कई स्टेज पर डाला जाता है। पहली खाद बिजाई से पहले ही डाला जाता है। उसके बाद पहली सिंचाई के समय और फिर फूल आने के समय पर खाद डाला जाता है।

प्रशन्न: कपास में पोटाश कब देना चाहिए? – When should potash be given in cotton?
उत्तर: कपास के खेत में पोटाश बीजों की बुवाई के 55 दिन के बाद डालनी चाहिए।

प्रशन्न: सबसे गंदी फसल कौन सी है? – Which is the dirtiest crop?
उत्तर: कपास की फसल को सबसे गन्दी फसल माना जाता है। इसमें कीटनाशकों का सबसे अधिकउपयोग किया जाता है और तुड़ाई के समय भी होने वाली परेशानी को देखते हुए भी इसको सबसे गन्दी फसल कहा जाता है।

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