पशुओं के गर्भधारण में आ रही है समस्या तो ये अचूक दवाई करेगी काम , भारतीय पशु अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित

Written by Vinod Yadav

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बदलते मौसम और गलत चारे की वजह से पशुओ में गर्भधारण की समस्या काफी अधिक देखने के लिए मिल रही है और पशुपालक इस समस्या के लिए कई तरीके अपनाते है जिससे कई बार पशु ख़राब भी हो जाता है। उनमे परमानेंट बाँझपन आ जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए भारतीय पशु अनुसन्धान संसथान की तरफ से पशुओ के लिए खाश लड्डू तैयार किया गया है जिससे पशुओ में गर्भधारण की समस्या से निदान मिल जाता है।

कैसे तैयार होता है लड्डू

इस लड्डू को शीरा, चोकर, नॉन प्रोटीन नाइट्रोजन, मिनरल मिक्सचर और नमक के मिश्रण से तैयार किया जाता है. 250 ग्राम के 1 लड्डू को बनाने में 10 से 20 रुपये का खर्च आएगा. पशुपालक इस लड्डू को बनाने के लिए ट्रेनिंग भी ले सकते है। कई पशुपालक एनिमल रिसर्च सेण्टर से इसके लिए ट्रेनिंग ले चुके है

दवाई के प्रभाव से गर्भधारण होगा समय पर

पशु पोषण विभाग के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पुतान सिंह बताते हैं कि ये लड्डू आईवीआरआई ने बनाकर रखा हुआ है इससे पशु में समय पर गर्भधारण करने के लिए हिट बनती है संस्थान अब ऐसे व्यवसायियों की तलाश में है, जो इस लड्डू को बनाने के अधिकार को उनसे खरीदे, ताकि इसे मार्केट में उतार कर पशुपालकों को ज्यादा से ज्यादा लाभ पहुंचाया जा सके.

कितने दिन तक दवाई देने से होगा लाभ

यदि किसी पशु को गर्भधारण में समस्या हो रही है तो इसके लिए भारतीय पशु अनुसंधान संस्थान के पशु पोषण विभाग के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पुतान सिंह के मुताबिक पशु को रोजाना 20 दिन तक सुबह और शाम के समय ये लड्डू खिलाना है इससे महीने के अंदर पशु की गर्भधारण की समस्या खत्म हो जाती है। इसके साथ ही पशु के दूध उत्पादन की क्षमता भी इस लड्डू से बढ़ती है।

पशुपालको को दी जा रही है ट्रेनिंग

भारतीय पशुपालन विभाग की तरफ से पशुपालन करने वाले लोगो को भारतीय पशु अनुसंधान संस्थान की तरफ से ट्रेनिंग भी मुहया करवाई जा रही है इसके साथ ही पशुपालक इस दवाई को पशु के लिए ऑर्डर भी कर सकते हैं.

About Vinod Yadav

My name is Vinod Yadav and I am from Haryana. Although I do a job, but I am fond of writing. This blogging starts from here again. I belong to a farming family, so I have a good knowledge of agriculture. I am also an engineer in textile, so the market and plans are also taken care of. There's just one drawback. Bless you all. Hope to keep it. Jai Hind, Jai Jawan - Jai Kisan

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