11 लाख किसानो के लिए ब्याज माफ़ी योजना की तैयारी शुरू , जल्द किसानो को मिलेगा लाभ

Written by Vinod Yadav

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किसानो के लिए सरकार की तरफ से राहत की भरी खबर है मध्य प्रदेश राज्य में 11 लाख किसानों को दो हजार 415 करोड़ रुपये की ब्याज माफी दी जाएगी और इस योजना के तहत उन किसानो की कर्ज ब्याज माफ़ी की जाएगी जो किसान समय पर ऋण नहीं चुकाए है और डिफॉल्टेर हो गए है

 

मध्य प्रदेश में इन किसानो पर करीब 6 हजार 82 करोड़ रूपये का ऋण ब्याज बकाया है। इन 6 हजार 82 करोड़ रु में से दो हजार 415 करोड़ रु सिर्फ ब्याज के बकाया है। सरकार के सहकारिता विभाग की तरफ से कर्ज ब्याज माफी योजना की पूरी प्लानिंग तैयार की जा रही है। इस योजना के तहत उन किसानो को लाभ होगा जिन्होंने दो लाख रूपये तक का ऋण कृषि साख सहकारी समिति से लिया हुआ है सरकार की तरफ से प्लान की जा रही इस योजना को अभी कैबिनेट की मंजूरी मिलनी बाकि है। इसके बाद किसानो को इस योजना का लाभ दिया जाना है

 

मध्य प्रदेश राज्य में उन किसानो को इस योजना का लाभ दिया जाना है जिन्होंने वर्ष 31 मार्च 2023 तक ऋण राशि को चुकता नहीं किया है। और इसके लिए राज्य और जिला स्तर पर समिति बनाई जाएँगी और ये समिति किसानो को सूचि को तैयार करेगी और ये सूचि कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति से अनुमोदन के बाद अपैक्स बैंक को भेजी जानी है। यहां परीक्षण करने के बाद आयुक्त सह पंजीयक सहकारी संस्थाएं के माध्यम से प्रस्ताव शासन भेजा जाएगा। ब्याज की राशि मिलने के बाद सहकारी समितियां ब्याज माफी के प्रमाणपत्र जारी करेंगी।

राज्य में चार हजार 536 सहकारी समिति है जिनके माध्यम से किसान कम समय के लिए खरीफ और रबी की फसल के समय ऋण लेते है और ये ऋण सरकार की तरफ से किसानो को बिना ब्याज दर के उपलब्ध करवाया जाता है। किसानो को ये ऋण रबी की फसल के लिए 15 जून और खरीफ की फसल के लिए 28 से पहले भरना होता है। समय पर ऋण नहीं चुकता करने पर सरकार की तरफ से इन ऋणों पर 13 प्रतिशत से अधिक ब्याज दर वसूलने का प्रावधान किया गया है। और इसके लिए ऋण पर ब्याज उसी दिन से गिना जाता है जिस दिन किसान ने ऋण लिया था

About Vinod Yadav

My name is Vinod Yadav and I am from Haryana. Although I do a job, but I am fond of writing. This blogging starts from here again. I belong to a farming family, so I have a good knowledge of agriculture. I am also an engineer in textile, so the market and plans are also taken care of. There's just one drawback. Bless you all. Hope to keep it. Jai Hind, Jai Jawan - Jai Kisan

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