How to Start Animal Husbandry -पशुपालन की शुरुआत कैसे करें – देखिये सबसे बेहतरीन तरीके

Written by Vinod Yadav

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How to Start Animal Husbandry – भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए पशुपालन एक मुख्य व्यवसाय है। इसके जरिये बहुत से ग्रामीणों के परिवारों का गुजर बसर चलता है। वैसे पशुपालन व्यवसाय भी कृषि का ही एक भाग है और अगर आप पशुपालन करने की सोचा रहे है तो आप बिलकुल निश्चिंत हो जाइये क्योंकि आपको इस आर्टकिले में पशुपालन व्यवसाय से जुडी सभी जानकारी यहाँ पर मिलने वाली है।

पशुपालन व्यवसाय के अंतर्गत बहुत से पशुओं का पालन आता है कैसे गाय,भैंस, बकरी, भेड़, आदि। ऐसे मेअगर आप पशुपालन करना चाहते हैं तो आपको इसके बारे में पूरी जानकारी होनी भी जरुरी है। इस सफल पशुपालन बिजनेस के लिए कुछ बातें बहुत ही इम्पोर्टेन्ट होती है जिनके जरिये आप अपने पशुपालन के व्यवसाय को बहुत आगे तक बढ़ा सकते हैं। पशुपालन के लिए ध्यान रखने वाली बातें कौन कौन सी हैं वो हमने आगे बताई है। आपसे निवेदन है की आर्टिकल को आखिर तक जरूर पढ़ना।

पशुपालन के लिए उपयुक्त स्थान का चुनाव करना – Choosing a suitable place for animal husbandry

How to Start Animal Husbandry – जब भी आप पशुपालन की शुरुआत करें या फिर योजना बना रहे है तो सबसे पहली चीज जो देखनी होती है वो है पशुपालन के लिए सही जगह का चुनाव करना। डेरी फार्म के लिए आप जगह का चुनाव शहर या कस्बे के पास कर सकते हैं। इससे आपको ये फायदा होगा की एक तो आपको ग्राहक अधिक मिल जायेंगे और दूसरा आपको रेट गांवों की तुलना में अच्छे मिल जायेंगे। पशुपालन व्यवसाय के लिए आपको उपयुक्त जगह देखिनी होगी जहां पर पशुपालन डेरी फार्म करने में आपको कोई दिक्कत ना हो और दूसरी बात की आपके डेरी फार्म के लिए सभी सुविधाएँ भी आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए। चलिए देखते हैं की पशुपालन व्यवसाय के लिए जगह का चुनाव कैसे करें।

  • जगह उचाई पर होनी चाहिए। इसके कई फायदे हैं जैसे बारिश में पानी का जमाव नहीं होगा, गोबर और मूत्र का मिश्रण ाशिनी से बहार निकल जायेगा और डेरी फार्म की सफाई करने में भी कोई परेशानी नहीं होगी। इसलिए पशुपालन के लिए हमेशा उचांई वाली जगह का चुनाव करें।
  • जगह खुली होनी चाहिए क्योंकि अगर जगह भीड़ भाड़ वाली होगी तो डेरी फार्म में ठीक तरीके से हवा का परवाह नहीं हो पायेगा और पशुओं के साथ साथ आपको भी परेशानी होगी। एक तरफ से जगह खुली होगी तो वहां का वातावरण भी अच्छा होगा।
  • कनेक्टिविटी बहुत जरुरी है क्योंकि अगर आपका डेरी फार्म रोड से बहुत दूर होगा तो भी आपको परेशानी होगी लेकिन ेस्जम्मे इस बात का भी ख्याल रखा जाना चाहिए की जहां ट्रांसपोर्ट बहुत अधिक है उस जगह से भी दुरी हो। क्योंकि ज्यादा ट्रांसपोर्ट होने पर उनकी आवाजों से पशुओं को दिक्कत होगी। इसलिए 200 – 300 मीटर की दुरी बिलकुल सही रहेगी।
  • बिजली और पानी की सुविधा भी बहुत जरुरी है। आपको अपने डेरी फार्म के लिए इस बात का भी ख्याल रखना होगा की वहां प्रॉपर तरीके से बिजली का प्रबंध हो और साथ में पशुओं के पीने और उनको नहलाने आदि के लिए पानी का भी प्रबंध आसानी से हो जाये।

तो मोटामोटी तौर पर ये वो बातें है जो आपको अपने पशुपालन व्यवसाय (How to Start Animal Husbandry) को शुरू करने से पहले देखनी होगी। तो अब बात करते है दूसरे और सबसे जरुरी पॉइंट पर। ये पॉइंट है पशुओं की नस्ल को लेकर। क्योंकि आफ्टरऑल आप पशुपालन का व्यवसाय पैसे कमाने के लिए ही तो कर रहे हैं। इसलिए जो पशु आप अपने डेरी फार्म में रखने वाले है उनकी नस्ल को लेकर भी आपको खास ध्यान देना होगा। आपको ये निर्धारित करना होगा की आपके डेरी फार्म में अच्छी क्वालिटी की नस्ल के पशु हो जो आपको अच्छा मुनाफा दे सके।

पशुपालन के लिए पशु नस्ल का चुनाव कैसे करे? – How to choose animal breed for animal husbandry?

आप पशुपालन व्यवसाय शुरू (How to Start Animal Husbandry)  कर रहे हैं तो पशु की नस्ल का चुनाव करना आपके लिए सबसे जरुरी पॉइंट होता है। क्योंकि अगर पशु सही नहीं है तो आपको पशुपालन व्यवसाय से मुनाफा नहीं होने वाला। इसलिए पशु की नस्ल का चुना करते समय आपको निम्न बातों का ध्यान रखना होगा।

  • दुधारू पशुपालन अगर आप कर रहे हैं तो आपको सबसे पहले अपने आस पास के क्षेत्र से ही पशुओं को खरीद करनी चाहिए और जो नस्ल आपके क्षेत्र के हिसाब से सही है उसी नस्ल का पशु खरीदना चाहिए।
  • इसके साथ में आपको ये भी ध्यान रखना है की पशु उन्नत नस्ल का होना चाहिए जिससे आपको ज्यादा से ज्यादा मुनाफा हो सके।
  • अगर दुग्ध उत्पादन के लिए आप पशुपालन कर रहे है तो आपको गाय और भैंस का चुनाव करना चाहिए। इनसे आपको दुग्ध की मात्रा ज्यादा मिलेगी और आपको अपने व्यवसाय में बचत अधिक आएगी।
  • पशु की दुग्ध उत्पादन की छमता पर खास ध्यान देना है क्योंकि इसके लिए ही आप पशु खरीद रहे हो।
  • पशु खरीदते समय पशु के स्वास्थ पर भी ध्यान देना जरुरी है। पशु को किसी प्रकार का रोग ना हो इसकी पूरी तरह से जाँच पड़ताल कर लें।
  • पशुपालन के लिए पशु का चुनाव करते समय आपको पशु की आयु का भी ध्यान रखना है ताकि आपको लम्बे समय तक उस पशु से लाभ मिल सके।
  • पशु की शारीरिक संरचना पर भी आपको ध्यान देना होगा।

पशु की शारीरिक संरचना के हिसाब से पशु के बारे में पूरी जानकारी निकल ली जाती है। जो पशुओं के सौदागर होते हैं वो नजर पढ़ते ही पशुओं के बारे में अंदाजा लगा लेते है। वे पशुओं की शारीरिक संरचना के आधार पर ही ऐसा करते है। शारीरिक संरचना से पशु के दुग्ध उत्पादन की छमता का भी निर्धारण हो जाता है। पशुओं की शारीरक छमता के बारे में हम आगे ऐसी आर्टिकल में बात करेंगे।

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 पशुपालन के लाभ और महत्व क्या हैं – What are the benefits and importance of animal husbandry

पशुपालन करना हमारे समाज में सदियों से चली आ रही एक प्रथा है। आज के समय में दुनिया में बहुत से ऐसे देश मौजूद हैं जहां पशुपालन का व्यवसाय उनकी अर्थवयवस्थाओं का हिस्सा बना हुआ है। वैसे भी पशुपालन मानव जीवन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। पशुपालन से हमें अपने दैनिक जीवन में काम आने वाली बहुत साडी चीजें मिलती है कैसे दुग्ध, दही, घी आदि। पशुपालन करने (How to Start Animal Husbandry)  के बहुत सारे फायदे है और बहुत सारे महत्त्व भी हैं। चलिए आपको एक एक करके पशुपालन के फायदे और महत्त्व बताते हैं।

खाध पदार्थों की प्राप्ति – पशुपालन से हमें खाद्य पदार्थ मिलते है जो हमें शरीर के पोषक तत्वों की प्राप्ति का एक मुख्य स्त्रोत है। पशुपालन से हमें दुग्ध, ऊन जैसी चीजें मिलती है जो गायों, भैंसों, भेड़ों और बकरियों के पालन से प्राप्त होती है। इंसान सदियों से अपने अस्तित्व को बचाये रखने में पशुपालन का सहारा लेता रहा है। पशुपालन मनुष्य को अपना और अपने परिवार को भरण पोषण करने में सक्षम बनाता है।

आय का साधन – पुरे भारत में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में बहुत से लोग पशुपालन करके अपना और अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। पशुपालन का व्यवसाय रोजगार पैदा करता है। इसके अलावा पशुओं से प्राप्त पदार्थों को निर्यात करके एक बहुत बड़ा राजस्व भी उत्पन्न होता है। छोटे किसानो के लिए तो आय का मुख्य साधन ही पशुपालन होता है।

प्राकृतिक खाद की प्राप्ति – पशुपालन ने मनुष्य के साथ साथ पर्यावरण को बचने में भी बहुत बड़ी भूमिका बनाई हुई है। पशुओं के गोबर से जो खाद मिलता है उसे खेती के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस खाद में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम जैसे महत्वपूर्ण तत्व होते है जो पौधों को बढ़ने में मदद करते हैं। पशुओं से मिलने वाले गोबर के खाद के उपयोग से जमीन की उर्वरक छमता भी बढ़ती है। पशुपालन पर अगर ज्यादा जोर दिया जाये तो ज्यादा मात्रा में उनसे खाद प्राप्त हो सकता है और जो रासायनिक खाद फ़िलहाल खेतों में उपयोग हो रहा है उसमे कमी लाई जा सकती है।

पशुपालन का सांस्कृतिक महत्व: पशुपालन दुनिया भर में कई देशों की संस्कृतियों का एक अनिवार्य हिस्सा है। पशुपालन अक्सर पारंपरिक कृषि पद्धतियों से जुड़ा होता है, और कई त्यौहार और अनुष्ठान भी पशुधन की परवरिश और उनकी देखभाल पर ही आधारित होते हैं। बहुत से देशों में और खासकर भारत की कुछ संस्कृतियों में पशुपालन को धन और प्रतिष्ठा के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

पशुपालन से पशुओं का कल्याण – हालांकि पशुओं की सुरक्षा के लिए समय समय पर पशुपालन की प्रथाएं आती रहती हैं। इंसान पशुपालन करके पशुओं को समय पर भोजन, पानी और उनके रहने की जगह प्रदान करता है। साथ में उनमे होने वाली बिमारियों से भी उनकी रक्षा करता है। इन सब चीजों ने पशुओं के कल्याण की तरफ एक कदम हमेशा बढ़ाया है।

कृषि कार्यों में सहयोग – पशुओं का कृषि कार्यों में बड़ा योगदान होता है। पशुओं के गोबर से खाद मिलता है। पशुओं से खेतों की जुताई या फिर माल ढुलाई का काम भी किया जाता है। इसलिए पशुपालन अपने आप में बहुत ही बेहतर तरीके से इंसानो की मदद करता है।

तो ये थे कुछ पशुपालन के लाभ और महत्त्व। लेकिन ये तो हमने बहुत ही थोड़े से आपको बताये हैं। इसके अलावा भी पशुपालन के बहुत सारे लाभ और बहुत सारे महत्व है जिनकी चर्चा फिर कभी किसी आर्टिकल में विस्तार से करेंगे।

पशुपालन शुरू करने से पहले इन बातों का ध्यान रखें – Keep these things in mind before starting animal husbandry

अगर आप पशुपालन का व्यवसाय (How to Start Animal Husbandry)  करने वाले हैं तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो ये आपके लिए पशुपालन व्यवसाय के लिए सही नहीं होगा। देखिये किन बातों का ध्यान आपको रखना हैं।

  • सबसे पहले आपको ये निर्धारित करना होगा की आप कौन से पशु का पालन करने की योजना बना रहे हैं।
  • इसके बाद आपको उससे उत्पन्न उत्पादों के मार्किट का भी निरिक्षण करना होगा जैसे की आप उन उत्पादों को कहाँ बेचेंगे।
  • आपने नजदीक के मार्किट की डिमांड के अनुसार ही आप अपने पशुपालन व्यवसाय को बढ़ा या घटा पाएंगे इसलिए ये जरुरी है की पहले आप मार्किट का निरिक्षण करें।
  • पशुओं के लिए आपको एक आवास यानि की शेड का निर्माण भी करना होगा जिसमे पशुओं से जुडी सभी सुविधाएँ मौजूद हो।
  • पशुपालन व्यवसाय शुरू करने से पहले आपको उसके लिए बजट निर्धारित करके उसकी व्यवस्था करनी होगी। क्योंकि पशुपालन के लिए आपको पशु भी लेने होंगे और उनके लिए चारे का प्रबंध भी करना होगा।
  • पशुपालन के लिए आपको पशु चिकित्सा देखभाल के लिए चिकित्सक, पशुओं का बीमा और पशुपालन में हो रहे अन्य खर्चों की लागतों को भी ध्यान में रखना होगा और उसके हिसाब से अपना बजट बनाना होगा।
  • पशुपालन में काम आने वाले उपकरण भी आपको लेने होंगे। लेकिन ये निर्भर करेगा की आप कितने बड़े सत्तर पर पशुपालन करना चाहते है।
  • पशुपालन के डेरी फार्म पर काम करने के लिए आपको कामगारों की भी जरुरत पड़ेगी। अपने व्यवसाय को अच्छे और प्रभावी ढांड से चलने के लिए आपको प्रक्षिक्षित कामगारों की जरुरत पड़ेगी।
  • पशुओं के अच्छे स्वास्थ के लिए आपको पशु चिकित्सक से भी सम्पर्क बनाने होंगे जो समय समय पर पशुओं को लगने वाले टिके भी लगा सके और पशुओं के स्वास्थ की भी देखभाल कर सके।
  • पशुपलान से प्राप्त उत्पादों को मार्किट में बेचने के लिए भी आपको एक ठोस रणनीति बनानी होगी। आजकल बाजार में प्रतिस्प्रधा बहुत अधिक है इसलिए आपको इसके लिए बाजार का अच्छे से निरिक्षण करना होगा। अपने उत्पाद का मूल्य भी बहुत सोच समझ कर निर्धारित करना होगा।

पशुपालन के लिए पशु आहार का प्रबंध करना – Managing animal feed for animal husbandry

पशुपालन शुरू करने से पहले (How to Start Animal Husbandry) और बाद में भी आपको पशुओं के आहार पर खास ध्यान देने की जरुरत पड़ेगी। पशुओं के आहार पर ही आपके उत्पाद की छमता निर्भर करेगी। अगर आप पोस्टिक आहार का चयन करते हैं तो आपके पशुपालन व्यवसाय के लिए बहुत ही बढ़िया रहेगा। पशुओं के लिए आहार की कुछ जानकारी हमने यहाँ निचे दी है। एक बार जरूर देखिये –

  • दुधारू पशु और गर्भवती पशु को हमेशा 2 तिहाई सूखे चारे के साथ में 1 तिहाई हरा चारा मिश्रित करके देना चाहिए।
  • दुधारू पशु और गर्भवती पशु को हमेशा सामान्य आहार की तुलना में अधिक संतुलित आहार की जरुरत होती है।
  • पशुओं के चारे में 4०% अनाज होना चाहिए, 40% खली होनी चाहिए और इसके अलावा शेष 20% चाकर मिश्रित करके देना चाहिए।
  • पशुओं के लिए संतुलित आहार का चयन उनके साइज, उम्र और उनकी प्रजाति तथा आहार देने के उद्देस्य पर भी निर्भर करता है।

सभी किसान भाइयों और जो भी भाई पशुपालन का कार्य करना चाहते है उनसे निवेदन है की पशुओं के चारे का निर्धारण करने से पूर्व एक बार अपने पशु चिकिरसक की सलाह भी जरूर ले।

पशुपालन शुरू करने के बाद रखें इन बातों का ध्यान – Keep these things in mind after starting animal husbandry

अगर पाने पशुपालन का व्यवसाय शुरू कर दिया है तो अब आपको कुछ बातें है जिनका खासकर ध्यान रखना होगा। इनके बगैर आप अपने पशुपालन व्यवसाय की ठीक ढंग से नहीं चला पाएंगे। तो आइये देखते है वो कौन जी जरुरी बातें हैं जो आपको पशुपालन व्यवसाय (How to Start Animal Husbandry) शुरू करने के बाद ध्यान में रखनी हैं।

  • सबसे पहली बात पशुओं के पोषण का विशेष ध्यान रखना है। अगर अपशुओं को संतुलित भोजन मिलेगा और उनका स्वास्थ अच्छा रहेगा तो आपके उत्पादन की क्षमता भी अच्छी रहेगी।
  • दूसरी जरुरी बात पशुओं को जहाँ रखा गया है यानि की जो पशुओं का आवास है उसको हमेशा साफ और सुथरा रखना हैं। इससे पशुओं में बीमारी का खतरा नहीं रहता। साथ में उस स्थान की नालियों को साफ रखें ताकि पशुओं का मूत्र इत्यादि आसानी से बहार निकल सके। जहां पशु रहते हैं वहां धुप का भी प्रबंध रखना जरुरी है ताकि धुप आने से वहां कीटाणु नहीं पनपेंगे।
  • पशुओं के आवास में उनके लिए पानी और खाने की व्यवस्था का भी ध्यान रखना बहुत आवश्यक है। डेरी के कामो में वैसे भी पानी की काफी जरूरत होती है और ख़ास तौर पे गर्मी के मौसम में आपको पशु के लिए पानी का प्रबंध उचित मात्रा में करके रखना चाहिए।
  • पशु पालन में अपने पशु के स्वस्थ्य का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। अपने सभी पशुओं को सही समय पर जरुरी टीकाकरण जरूर करवाएं ताकि उनको बिमारियों से बचाया जा सके।
  • समय समय पर अपने डेरी फार्म के सभी पशुओं की चिकित्सा जाँच करवाते रहें ताकि पशुओं को होने वाली किसी भी बीमारी से रोकथाम की जा सके। कभी भी पशु के बीमार होने पर खुद से उसका ीतलज ना करें नहीं तो ये आपके लिए भी और आपके पशु के लिए भी हानिकारक साबित हो सकता है। तो हमेशा समय समय पर अपने पशुओं की जाँच चिकित्सक से जरूर करवाएं।
  • अगर आप पशुपालन कर रहे हैं तो अक्सर ये होता है की पशुओं को ख़रीदा और बेचा भी जाता है लेकिन ध्यान रखें की जब तक ज्यादा मुनाफा नहीं हो रहा हो तो पशु को ना बेचें। अगर आप बकरी पालन कर रहे हैं तो बकरीद आदि के मौके पर पशुओं को बेच कर अच्छा खासा मुनाफा कमाया जा सकता है।
  • इसके अलावा आपके पशुपालन व्यवसाय से जो भी उत्पाद आप कर रहे हैं उसको मार्किट में भेजने से पहले आप अपनी तरफ से कभी भी उसमे मिलावट ना करें। अगर आप मिलावट करेंगे तो आपके ग्राहकों पर इसका उल्टा असर होगा और धीरे धीरे मार्किट में आपका नाम ख़राब होगा। इससे आने वाले समय में आपके व्यवसाय पर भी बहुत गहरा असर होगा और हो सकता है एक दिन आपका व्यवसाय बंद भी हो जाये।

तो किसान भाइयों ये थी पशुपालन से जुडी जानकारियां जो आपके पशुपालन व्यवसाय शुरू करने और उसके बाद में भी बहुत काम आने वाली है। आपको हमारा ये पशुपालन व्यवसाय (How to Start Animal Husbandry) का आर्टिकल कैसा लगा हमें निचे कमेंट करके जरूर बताना और अगर आप हमसे कोई सवाल पूछना चाहते हैं तो भी आप निचे हमें कमेंट कर सकते हैं। हम तुरंत प्रभाव से आपके हर सवालों के जवाब यहाँ देंगे। आप हमसे Kisan Yojana के WhatsApp Group के माध्यम से भी जुड़ सकते हैं जहां हर खबर आपके मोबाइल पर सीधे आपके पास पहुंचे जाती है। अपना कीमती समय देने के लिए आपका धन्यवाद – जय हिन्द -जय जवान -जय किसान

About Vinod Yadav

My name is Vinod Yadav and I am from Haryana. Although I do a job, but I am fond of writing. This blogging starts from here again. I belong to a farming family, so I have a good knowledge of agriculture. I am also an engineer in textile, so the market and plans are also taken care of. There's just one drawback. Bless you all. Hope to keep it. Jai Hind, Jai Jawan - Jai Kisan

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