Wheat Farming: गेहूं की खेती करने की सम्पूर्ण जानकारी, पैदावार, बुवाई, सिंचाई और देखभाल

Written by Priyanshi Rao

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Wheat Farming: भारत देश प्राचीन समय से ही गेहूं की खेती करता आ रहा है। भारत में गेहूं की खेती अत्यधिक मात्रा में की जाती हैं क्योंकि खाद्यान्न फसल में गेहूं का अत्यधिक महत्व है। गेहूं की खेती को भारत में उच्च स्थान प्रदान किया गया है एवं गेहूं की खेती में आवश्यक कार्य को करने के लिए कई तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही नवीनतम मशीनों के उपयोग से गेहूं की खेती को अधिक से अधिक मात्रा में किया जा रहा है।

Table of Contents

गेहूं की खेती में खेत को तैयार कैसे करें?, गेहूं की खेती में उन्नत किस्मों का चयन कैसे करें?, गेहूं की खेती में बीज की बुवाई कैसे करें?, गेहूं की खेती में किस किस्म के खाद का उपयोग करें?, गेहूं की खेती के लिए किन बीजों का चयन करें?, गेहूं की खेती में निराई गुड़ाई कैसे करें?, गेहूं की खेती में होने वाले रोग कौन से हैं एवं इन्हें रोकने के उपाय क्या है?, गेहूं की खेती में सिंचाई कैसे करें?, गेहूं की खेती में सिंचाई करते समय ध्यान देने वाली मुख्य बातें क्या है?, गेहूं की खेती में कटाई कैसे करें? एवं हमारे भारत देश में गेहूं का इतिहास क्या है? इत्यादि सभी प्रकार कि महत्वपूर्ण जानकारियों के बारे मे आज हम इस पोस्ट में विस्तार से जानेंगे।

यदि आप भी गेहूं कि खेती को अच्छे से करना चाहते हैं तो हमारे इस आर्टिकल को पूरा अवश्य पढ़ें।।

गेहूं की खेती के लिए खेत को तैयार कैसे करें – How to prepare the field for wheat cultivation

सभी यह तो जानते ही हैं कि किसी भी खेती को करने के लिए पहले खेत की तैयारी करना कितना महत्वपूर्ण होता है। और गेहूं की खेती करने के लिए खेत में सही समय पर बीज लगना बहुत जरूरी है एवं बीज लगाने के लिए हमें सबसे पहले इससे पूर्व वाली फसल का बीज सही समय पर लगाना होगा एवं फसल पक जाने पर उसकी सही समय पर कटाई भी कर लेनी है एवं फिर कुछ समय तक खेत को सुखा ही छोड़ देना है। उसके बाद गेहूं बोने के कुछ दिनों पहले खेत की जुताई कर लेनी हैं। इसके साथ ही जुताई मोल्ड बोर्ड हॉल एवं डिस्क हीरो हल से कराई जानी चाहिए, क्योंकि इसकी जुताई से जमीन में अधिक नमी रहती हैं। इसके बाद फिर से डिस्क हीरो हल (Disc Hero Plow एक प्रकार के कल्टीवेटर का नाम) के द्वारा खेत को जुताई करके मिट्टी को पलट देना है। और हां अगर एक या दो बार जुताई करने से आपके खेत की नमी अनुपयोगी हो जाती हैं, तो खेत के अंदर व्हीट के बीज की बुवाई कर सकते हैं। इससे खेत की मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ेगी।

गेहूं की खेती से पहले खेत में जो धान के छोटे-छोटे पासे होते हैं, उनको सड़ाने के लिए 20 से 25 किलो यूरिया प्रति हेक्टर की दर से खेत की जुताई के साथ अवश्य डाल दें। इसके कारण खेत की सभी प्रकार की अनावश्यक चीजें सढ़कर गल जाती है, इससे एक या दो की जुताई में ही खेत बढ़िया तरीके से तैयार हो जाता है।

गेहूं की खेती के लिए उन्नत किस्में – Improved Varieties for Wheat Cultivation

भारत देश के अंदर गेहूं की खेती की लगभग कई प्रकार की किस्मौ की खैती की जा चुकी है एवं की जा रही है। गेहूं की खेती के लिए उपयोग में ली जाने वाली कुछ प्रमुख किस्में निम्नलिखित हैं।।

  • गेहूं की खेती कि प्रमुख किस्मों में देवा (K.-9107) का नाम सबसे अधिक आता है। क्योंकि इसके अंदर गेहूं का उत्पादन लगभग 40 से 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से निकलता है। इस किस्म को वर्ष 1966 में जारी किया गया है। यह किस्म लगभग 130 से 135 दिनों के अंदर पक जाती हैं। इस किस्म के पौधे की ऊंचाई लगभग 105 से 110 सेंटीमीटर तक होती है।
  • DBW-17 गेहूं की खेती की एक प्रमुख किस्म है। यह किस्म 2007 में निकाली गई है। इस किस्म का मुख्य रूप से उत्पादन भारत के दिल्ली,उत्तर प्रदेश,उत्तराखंड,राजस्थान,पंजाब,हिमाचल प्रदेश एवं जम्मू कश्मीर राज्य में किया जाता है। इस किस्म की उत्पादकता लगभग 60 से 65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से होती है यह किस लगभग 125 से 135 दिन के अंदर अंदर पक जाती हैं। इसके पौधे की लंबाई लगभग 95 से 110 सेंटीमीटर तक होती है।
  • HP-1761A यदि एक प्रकार की गेहूं की बेहतरीन किस्म है। इस किस्म के पौधे की लंबाई लगभग 95 सेंटीमीटर तक होती है एवं यह किस्म 1997 में प्रकाशित की गई थी। इस किस्म में गेहूं का उत्पादन लगभग 40 से 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से होता है एवं इस किस्म के पौधे लगभग 135 से 140 दिन के अंदर अंदर पक जाते हैं।
  • UP-2382 यह गेहूं में मुख्य रूप से इस्तेमाल की जाने वाली किस्म है। इस किस्म को 1999 में प्रकाशित किया गया था। इसके अंदर गेहूं की उत्पादकता लगभग 60 से 65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से होती है एवं इस किस्म में गेहूं के पौधे की लंबाई लगभग 95 सेंटीमीटर से 105 सेंटीमीटर तक होती है। यह किस्म लगभग 132 से 137 दिन के अंदर अंदर पक कर तैयार हो जाती हैं।
  • HP-1731 (राजलक्ष्मी) यह किस्म भी गेहूं की किस्म में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। इस किस्म का प्रकाशन वर्ष 1995 में किया गया था। इस किस्म के अंदर 55 से 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से गेहूं का उत्पादन होता है। इसके पौधे की लंबाई 85 से 95 सेंटीमीटर तक होती है एवं 130 से 140 दिनों के अंदर अंदर यह किस्म पक जाती है।

गेहूं की बुवाई – Wheat Sowing

खेत को अच्छी तरह से जोत लेने के बाद गेहूं की बुवाई के लिए खेत को अच्छी नमी में रखना है। गेहूं की बुवाई हमेशा सीडड्रिल से करनी चाहिए सीडड्रिल से गेहूं की बुवाई करने से गेहूं की भी बचत होती है एवं समय की भी बचत होती है। गेहूं की बुवाई एक निश्चित समय पर होना जरूरी है क्योंकि अगर गेहूं की बुवाई निश्चित समय पर नहीं होगी एवं देरी से होगी तो उसकी उपज में उतनी ही गिरावट आएगी। गेहूं की बुवाई को हमेशा ही लाइन से करें। गेहूं की अच्छी बुवाई करनी है, तो गेहूं को अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में बोह देना चाहिए।

गेहूं की खेती के लिए खाद – Fertilizer for wheat cultivation

बुवाई करने के साथ ही गेहूं की खेती में एक कुंटल प्रति हेक्टेयर की दर से डीएपी खाद का भी उपयोग करना चाहिए। खाद का उपयोग करने से गेहूं की उर्वरता में बढ़ोतरी होती है। अगर खेत अच्छी दशा में है, तो डीएपी की मात्रा को 25 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से बढ़ा भी सकते हैं।

खेत में जैसे ही गेहूं की बुवाई हो जाती हैं तो उसके बाद सिंचाई करते समय गेहूं के एक खेत में लगभग 2 बार यूरिया का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। दोनों ही बार खाद की मात्रा 1 कुंटल प्रति हेक्टेयर की दर से अधिक एवं एक कुंटल प्रति हेक्टेयर की दर से कम भी नहीं होनी चाहिए‌। पानी पिलाने के बाद यूरिया प्रयोग करना चाहिए।

गेहूं की खेती के लिए उन्नत बीज – Improved seeds for wheat cultivation

गेहूं का बीज हमेशा मशीन के जरिए खेतों में डाला जाना चाहिए एवं खेतों में बीज को सीधा डाला जाना चाहिए। गेहूं की बुवाई में 100 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टर की दर में डाला जाना चाहिए एवं अगर बीज मोटा है तो 125 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर में डाला जाना चाहिए। अगर खेत में उर्वर क्षमता कम है तो गेहूं का सामान्य बीज 125 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से डाला जाना चाहिए एवं दाना मोटा होने पर 150 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से डाला जाना चाहिए। बीज की बुवाई करने से पहले बीच की जांच अवश्य कर ले एवं बीज का अंकुरण भी चेक कर ले। क्योंकि अगर हम गेहूं की खेती में पुराने बीज का उपयोग करेंगे तो उसके अंकुरण क्षमता कम होगी इसलिए अंकुरण क्षमता को एक बार अवश्य चेक कर ले।

गेहूं की खेती में गेहूं की निराई गुड़ाई – Wheat weeding in wheat farming

गेहूं की खेती में गेहूं की निराई गुड़ाई करना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि गेहूं में गेहूं के पौधे के अलावा पत्थरचट्टा, जंगली चौलाई, मकोय, हजार दाना, कनकव्वा, काला दाना, जंगली जूठ, सफेद मुर्ग एवं अगेव इत्यादि प्रकार के कई खतरनाक खरपतवार पाए जाते हैं, जो गेहूं की वृद्धि दर को रोकते हैं। साथ ही में गेहूं के पौधे की गुणवत्ता में कमी भी आती है। और जब किसान इन खरपतवारों को खेतों से अलग करते हैं तो उसे निराई गुड़ाई के नाम से जाना जाता है। अगर निराई गुड़ाई नहीं की जाए तो गेहूं की खेती में भारी नुकसान भी हो सकता है इसलिए निराई गुड़ाई करना अति महत्वपूर्ण कार्य है।

निराई गुड़ाई – Weeding hoeing

किसानों के द्वारा गेहूं के पौधों में अनावश्यक पौधों को हटाना ही निराई गुड़ाई कहलाता है। गेहूं की खेती में निराई गुड़ाई करने के लिए तीन प्रकार की विधियां बताई गई हैं। तीनों प्रकार की विधियां निम्नलिखित हैं।

  • कुदाल एवं खुरपे की सहायता से खरपतवारों को हटाना
  • मशीनों के द्वारा खरपतवार को हटाना
  • एवं अलग-अलग प्रकार के रासायनिक पदार्थों का उपयोग करके

गेहूं की खेती में आने वाले रोग एवं उनके रोकथाम – Diseases in wheat cultivation and their prevention

गेहूं की खेती में पौधों के साथ अनावश्यक पौधे तो होते ही है साथ मे पौधों में अनावश्यक रोग भी होते हैं जो गेहूं के पौधों की उपजाऊ क्षमता को कम करते हैं एवं उन्हें धीरे-धीरे नष्ट कर देते हैं। गेहूं की फसल में निम्नलिखित प्रकार के रोग लग सकते हैं।

  • गेरुई,
  • ब्लाइट,
  • अल्टरनेरिया,
  • रतुआ इत्यादि।

इन बीमारियों के कारण गेहूं की उपजाऊ क्षमता कम होती है। गेहूं के पौधों की पत्तियों का रंग भूरा हो जाता है। गेहूं की खेती में आने वाले रोगों को नियंत्रित एवं रोकने के उपाय निम्नलिखित हैं।

  • खेतों में गेहूं की बुवाई करने से पहले दीमक एवं रोगो के नियंत्रण के लिए Thiomethaxam 30% F.S. की 3 मिली. को मात्रा प्रति किग्रा की दर से बीजों की दर में संशोधित करना चाहिए। एवं अगर इस खरपतवार नाशक का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं तो आप क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ई.सी का उपयोग कर सकते हैं।
  • 60 से 70 किलो गोबर के अंदर Beauveria bassiana 15 percent बायोपेस्टीसाइड अर्थात जेव कीटनाशक खरपतवार को 2.5 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से मिला देना है एवं इसे मिलाकर हल्के पानी का छींटा दे देना है फिर उसके बाद इसे 8 से 10 दिन तक किसी कि छाव में रख देना है। बुवाई करने से पहले जो आखिरी जुताई की जाती है उस जुताई के साथ इसको भी खेत में डाल देना है इससे यह फायदा होता है कि भूमि जनित कीटो पर नियंत्रण पाया जा सके।
  • फसल खड़ी है एवं उसमें दीमक लग जाता है तो chlorpyrifos 20 percent E.C. 5 liters को प्रति हेक्टेयर की दर से सिंचाई के समय में पानी के साथ इसका छिड़काव कर देना है।
  • अगर फसल में माहू कीट लगा है तो इसको नियंत्रण करने के लिए आपको सबसे पहले थायोमेथाक्सम 25 प्रतिशत डब्लू.जी. 50 ग्राम को प्रति हेक्टर की दर से,डाइमेथोएट 30 प्रतिशत ई.सी. को प्रति हेक्टेयर की दर से एवंआंक्सीडेमेटान-मिथाइल 25 प्रतिशत ई.सी. की 1ली. मात्रा में 750 लीटर पानी में घोलकर इसका छिड़काव फसल में कर देना है।

गेहूं की खेती में सिंचाई – irrigation in wheat cultivation

देश के अंदर गेहूं की खेती अधिक मात्रा में एवं अच्छे प्रकार से होती है। इसका सबसे बड़ा कारण सिंचाई है, क्योंकि अगर पौधों को समय-समय पर पानी मिलता रहेगा तो पौधे अपनी उन्नत अवस्था में आसानी से आ जाएंगे,जिससे फसल अधिक मात्रा में निकलेगी। पौधों के विकास के लिए खेतों में जल का भराव अति आवश्यक माना जाता है। क्योंकि खेत के अंदर पानी सभी प्रकार के खाद्य एवं खरपतवार नाशको को घुलनशील कर देता है, जिससे खाद एवं खरपतवार नाशक अपना चमत्कार दिखा पाते हैं।

गेहूं की सिंचाई में ध्यान रखने वाली कुछ मुख्य बातें – Some important things to keep in mind while irrigating wheat

  • गेहूं की खेती अगर हल्की मिट्टी पर हैं तो सिंचाई को लगभग 6 सेंटीमीटर की गहराई तक करना चाहिए, तभी पौधे को भरपूर अवस्था में पानी मिलेगा।
  • साथ ही अगर गेहूं की फसल किसी दोमट मिट्टी में है तो आपको 8 सेंटीमीटर की गहराई तक सिंचाई करनी होगी क्योंकि दोमट मिट्टी में पौधे की जड़े गहरी होती है एवं 8 सेंटीमीटर तक सिंचाई होने से जड़ों तक पर्याप्त मात्रा में पानी पहुंच पाएगा।
  • एवं खेत बनाते समय अपने खेत में क्यारियां जरूर बना ले क्योंकि क्यारियां बनाने से खेत में आसानी से सिंचाई हो जाती है एवं कम पानी से ही खेत के प्रत्येक हिस्से तक सिंचाई हो जाती है।
  • अगर आपकी गेहूं की फसल किसी सूखे क्षेत्र में हैं एवं वहां पर पानी की ठीक प्रकार से व्यवस्था नहीं हो पाती तो अपनी फसल की बुवाई के 20 से 25 दिन एक बाद सिंचाई कर ले। इस सिंचाई के अंदर भी आप की फसल पक जाएगी।
  • अगर सही समय पर बारिश नहीं होती तो गेहूं के अंदर लगभग 4 से 6 बार सिंचाई करना आवश्यक है।
  • साथ ही अगर गेहूं की फसल दोमट मिट्टी पर ना होकर रेतीले भूभाग पर है तो फिर सिंचाई 6 से 8 बार करना आवश्यक है।
  • गेहूं की बुवाई कर देने के बाद किसी कारणवश अगर बारिश नहीं होती तो 15 दिन के बाद सिंचाई करना अति आवश्यक है।

गेहूं की खेती में गेहूं की कटाई – Harvesting wheat in wheat farming

गेहूं की फसल सूख जाने के बाद बिना किसी देरी के गेहूं की कटाई करवा लेनी चाहिए। क्योंकि अगर गेहूं की कटाई समय पर हो जाती है, तो फसल में लाभ अच्छा होता है। एवं समय पर कटाई हो जाने के बाद गेहूं का भूसा भी सही समय पर बन पाता है। आज हमारे भारत देश में गेहूं की कटाई दो तरीकों से की जाती है।

हाथ की कटाई – Harvesting by Hand cut

हाथ की कटाई के अंदर किसान अपने खुद के हाथों से फसल को काटते हैं। गेहूं को काटकर जगह-जगह पर ढेर कर देते हैं एवं फिर गेहूं के सूखने का इंतजार करते हैं। जैसे ही गेहूं सूखते हैं तो गेहूं में से मशीन द्वारा दाने को अलग कर लिया जाता है एवं घर पर उसका भंडारण कर दिया जाता है। हाथ की कटाई उपयोग छोटे कृषक करते हैं एवं छोटे खेतों को काटने के लिए हाथों से कटाई की जाती है।

कंबाइन द्वारा कटाई – Harvesting by combine

गेहूं की खेती हमारे भारत देश में खाघदान में एक बहुत बड़ा स्थान रखती है। क्योंकि हमारे भारत देश में गेहूं के खेत छोटे होने के साथ-साथ ही कई इलाकों में बड़े-बड़े खेत भी हैं। इन बड़े खेतों को combine machine के द्वारा ही काटा जाता है। कंबाइन मशीन के द्वारा गेहूं के बड़े-बड़े खेतों को आसानी से एवं कम समय में ही काटा जा सकता है।

गेहूं की खेती का इतिहास – History of Wheat Cultivation

  • भारत में सबसे ज्यादा गेहूं का उत्पादन पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार एवं उत्तर प्रदेश में होता है। भारत देश का लगभग 93.21 फ़ीसदी गेहूं का उत्पादन इन राज्यों से होता है।
  • पंजाब राज्य में भारत के लगभग 21.55 फ़ीसदी गेहूं का उत्पादन हो जाता है
  • भारत देश के अंदर सबसे ज्यादा गेहूं की खेती उत्तर प्रदेश राज्य में की जाती हैं। उत्तर प्रदेश राज्य के बाद पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश राज्य आते हैं।।
  • भारत देश लगभग विश्व के 15% गेहूं का उत्पादन करता है। पूरे विश्व में भारत देश गेहूं उत्पादन की दृष्टि से दूसरा बड़ा स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष में भारत देश के अंदर लगभग 107.59 मिलियन मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन होता है। इसके अलावा इसका एक बहुत बड़ा हिस्सा घरेलू खपत के लिए भी दिया जाता है।
  • भारत में गेहूं की खेती होने के के साक्ष्य सर्वप्रथम हड़प्पा एवं मोहनजोदड़ो से मिले हैं। साढ़े चार हजार साल पहले से ही गेहूं की खेती भारत देश के अंदर हो रही हैं।
  • गेहूं की किस्मों में सबसे महंगा गेहूं शरबती नामक गेहूं है यह गेहूं अपनी उच्च गुणवत्ता के कारण जाना जाता है।

Wheat Cultivation FAQ

  1. 1 विश्व का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश कौन सा है?

Ans – विश्व का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश चीन है। चीन दुनिया में गेहूं का लगभग 20.65% हिस्सा उत्पादन करता है। उसके बाद दुसरा बड़ा देश भारत है।

  1. 2 भारत देश के अंदर सबसे ज्यादा गेहूं की खेती किस राज्य में की जाती हैं?

Ans -भारत देश के अंदर सबसे ज्यादा गेहूं की खेती मध्यप्रदेश राज्य में की जाती हैं। उत्तर प्रदेश राज्य के बाद पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश राज्य आते हैं।।

  1. 3 गेहूं कि सबसे उन्नत किस्म कौनसी है?

Ans – पूसा यशस्वी (Pusa yashasvi) को गेहूं की सबसे उन्नत किस्म माना जाता है। इस गेहूं कि खेती कश्मीर, हिमाचल एवं उत्तराखंड राज्यों के लिए सबसे सही मानी जाती है।

  1. 4 भारत देश विश्व का कितना प्रतिशत गेहूं उत्पादन करता है?

Ans -भारत देश लगभग विश्व के 15% गेहूं का उत्पादन करता है।

  1. 5 विश्व में भारत देश का गेहूं उत्पादन की दृष्टि से कौनसा स्थान है?

Ans – विश्व में भारत देश गेहूं उत्पादन की दृष्टि से दुसरा बड़ा देश है?

Conclusion

उम्मीद करता हूं, दोस्तों की आपको हमारी पोस्ट पसंद आई होगी, आज की इस पोस्ट में हमने गेहूं कि खेती के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त की है। आज हमने गेहूं कि बुआई से लेकर कटाई तक सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करी है। यदि आपको अब भी कोई समस्या है तो आप हमें कमेंट करके पुछ सकते हैं। हम आपके कॉमेंट का जवाब देने की पुरी कोशिश करेंगे।।

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