खेत में लगाए रोशा घास, मिलेगा अच्छा खासा मुनाफा, जानिए इसकी खासियत

Written by Vinod Yadav

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खेतो में जब फसल बोते है तो अलग अलग तरीके की घास भी साथ उगती है लेकिन इसमें से कुछ घास बहुत काम की होती है जिसकी मार्किट में काफी कीमत होती है। और इस घास की खेती से आप अच्छा मुनाफा कमा सके है। हम बात कर रहे है रोशा घास के बारे में। इससे सुंगधित तेल का उत्पादन किया जाता है और विदेशी बाजारों में इसकी अच्छी मांग होती है इस घास की खेती में लागत कम होती है और मुनाफा अधिक होता है। रोशा घास से जो तेल उत्पादन होता है उसकी भारतीय मार्किट और विदेशो में अच्छी खासी मांग है कई जगहों पर इसके तेल को अवैध रूप से भी बेचा जाता है

एक बार बुआई के बाद छह साल तक फसल मिलेगी

रोशा घास में अन्य फसलों की तरह हर साल बुआई करने की जरुरत नहीं होती है इसमें आप एक बार बुआई करने के बाद तीन से छह साल तक उत्पादन ले सकते है इस फसल में बीमारिया भी बहुत कम लगी है जिसकी वजह से इसमें मुनाफा भी अधिक होता है

45 डिग्री तापमान सहने की क्षमता

रोशा घास को गर्मी के मौसम में बोया जा सकता है इस पर उच्च तापमान का भी असर नहीं होता है और 10 डिग्री तक के तापमान को सहन करने की क्षमता इसमें होती है गर्म और अधिक नमी वाले क्षेत्रों में इसकी अच्छी पैदावार होती है

खेत की तैयारी कैसे करे

रोशा घास की बुआई पौध रोपण विधि से करनी अच्छी होती है। इसके लिए मिटटी को भुरभुरा बना ले इसके लिए खेत को हैरो या कल्टीवेटर से जुताई कर सकते है इसमें खाद के रूप में गले सड़े गोबर का प्रयोग करना अच्छा होता है

सिंचाई

रोशा घास में गर्मी के दिनों में तीन से चार बार सिंचाई करनी चाहिए लेकिन जब आप इसकी कटाई कर रहे हो तब इसकी सिंचाई न करे कटाई के बाद इसकी सिंचाई करनी जरुरी है इसके बाद रोशा घास की दोबारा से फसल ले सकते है

बुआई का समय

रोशा घास की बुआई का समय अप्रैल से मई के महीने में पौध तैयार हो जानी चाहिए खेत में बीज को रेत के साथ मिलाकर लगभग 15-20 सेंटीमीटर की दूरी और 1-2 सेंटीमीटर की गहराई में या फिर छिड़ककर घास की बुआई करनी होती है . नर्सरी में तैयार किए गए पौधे लगभग 1 महीने में खेत में रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं.

रोशा घास की मार्किट में डिमांड

रोशा घास से सिर्फ तेल ही नहीं दर्द निवारक दवाई, ओषधि तेल, एंटीसेप्टिक भी बनाया जाता है। इसके साथ ही रोशा घास से सुंगधित तेल, सौन्दर्य से जुडी कई प्रकार की सामग्री बनाई जाती है भारत में इसके तेल की कीमत 250 रु लीटर तक के दाम मिल जाते है लेकिन यह कीमत राज्य के हिसाब से अलग अलग हो सकती है

About Vinod Yadav

My name is Vinod Yadav and I am from Haryana. Although I do a job, but I am fond of writing. This blogging starts from here again. I belong to a farming family, so I have a good knowledge of agriculture. I am also an engineer in textile, so the market and plans are also taken care of. There's just one drawback. Bless you all. Hope to keep it. Jai Hind, Jai Jawan - Jai Kisan

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