पूरी साल पशुओ के मिलेगा हरा चारा और खेतो को मिलेगी नाइट्रोजन, रिजिका की खेती करके लाभ कमाए।

Written by Vinod Yadav

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भारतीय किसान खेती के साथ-साथ पशुपालन भी करते हैं। इसलिए उन्हें चारे की बहुत ज्यादा आवश्यकता पड़ती है। रिजका की फसल पशुओं के चारे के रूप में बहुत अहम भूमिका रखती है। यह एक चारे की फसल है। यह एक बहू वर्षीय फसल है। इस फसल की एक बार बुवाई करने के बाद हम इसकी कटाई लगभग 3-4 वर्ष तक कर सकते हैं।

यह बहु वर्षीय एवं अधिक उपज क्षमता वाला चारा है। रिजका‌ भारत में उगाई जाने वाली एक महत्वपूर्ण फसल है। किसान इसे ज्वार, मक्का आदि की कटाई के बाद उगाते हैं। यह पशुओं के लिए स्वादिष्ट एवं पौष्टिक चारा होता है। जिससे गाय-भैंसे अधिक दूध देने में सहायक होती है। रिजका की खेती अधिकतर गर्मी में की जाती है, परंतु हम इसकी खेती वर्ष में कभी भी कर सकते हैं।

दोस्तों इसकी कई सारी किसमें होती है जिनके बारे में हम आगे चर्चा करने वाले हैं। आज की इस पोस्ट में हम रिजका‌ की फसल को लेकर संपूर्ण जानकारी प्राप्त करने वाले हैं, जैसे कि- रिजका की खेती के लिए खेत की तैयारी, रिजका की उन्नत किस्मे, रिजका की खेती के लिए मौसम कैसा होना चाहिए?, रिजका का बीज, रिजका की बुवाई, सिंचाई, खाद,  रिजका की फसल की निराई गुड़ाई, रिजका में रोग और उनकी रोकथाम, कटाई, रिजका का इतिहास, रिजका की खेती कौन से राज्य में होती है?, कितनी पैदावार होती है?

यदि आपके मन में भी यह सभी सवाल है और आप भी अपने पशुओं के लिए रिजका की खेती करना चाहते हो, तो आपको हमारी इस पोस्ट को पूरा पढ़ना है। हम इसमें इन सभी चीजों के बारे में आपको जानकारी प्रदान करेंगे ।।

रिजका की खेती के लिए खेत की तैयारी

रिजका या लुसर्न की खेती करने के लिए आपको सर्वप्रथम खेत की तैयारी करनी होती है। खेत की तैयारी के लिए आपको यह जाना आवश्यक है कि रिजका की खेती के लिए खेत में नामी एवं खेत सख्त होना चाहिए।

  • खेत की मिट्टी भुरभुरी होनी चाहिए एवं खेत को हल की सहायता से उसे 2-3 बार पलटे लगाकर जुताई करनी चाहिए।
  • जुताई करने से खेत समतल हो जाता है एवं उसमें पुरानी फसल के अवशेष भी नष्ट हो जाते हैं।
  • खेत समतल होगा तो फसल का अंकुरण ढंग से होगा और बराबर होगा।
  • रिजका (Lucerne) की खेती दोमट मिट्टी में अच्छे से होती है, क्योंकि दोमट मिट्टी में बुवाई करने से फसल 3-6 मीटर तक का पानी भी सोख सकती है। इसलिए इसे असिंचित इलाकों में भी किया जा सकता है। लाल एवं बलुई मिट्टी में ईसकी खेती नियमित मात्रा में होती है।
  • बुवाई से पूर्व मिट्टी के बारे में जानकारी अवश्य प्राप्त करें मिट्टी का pH मान 6.8 तक होना चाहिए।
  • खेत मेंचुना अवश्य डालें इससे मिट्टी का पीएच मान बड़ जाता है।
  • फसल की अच्छी बुवाई के लिए जुताई से पूर्व 30 टन प्रति हेक्टेयर के हिसाब से खेत में गोबर खाद मिलाकर जुताई करनी चाहिए।
  • खेत में जुताई के पश्चात समतल खेत में क्यारियां बना दे जिससे सिंचाई अच्छे से हो सकेगी।

रिजका की उन्नत किस्मे

  • यदि आप रिजका या लुसर्न की खेती करना चाहते हो तो आपको उन्नत किस्मों का ही उपयोग करना चाहिए।
  • ऐसी किस्म का उपयोग करें जो आपकी भूमि के लिए अधिक उपजाऊ क्षमता प्रदान करती है।
  • वैसे तो बाजार में कई सारी किस्मे मौजूद है, लेकिन हम आपको कुछ महत्वपूर्ण किस्मों के बारे में ही बताएंगे जो आपके खेत के लिए उपयुक्त है।
  • रिजका या लुसर्न की उन्नत किस्मों के रूप में आप मेसासिरसा, सिरसा- 8, सिरसा 9, टाइप 8, टाइप- 9, आर एल 88 बहुवर्षीय, सोनारा यूनिको, रेम्बलर, एल एल सी 3- वार्षिक, इगफ़ी -244, एन डी आर आई सलेक्शन- 1, सिरसा 8, लर फार्म, वर्नल, सिलेक्शन 11, क्यूगा, सेरेनाक, आनंद- 2, एल एल सी- 5 आदि रिजके की उन्नत किस्में हैं।

रिजका की खेती के लिए मौसम कैसा होना चाहिए?

  • रिजका (Lucerne) की खेती समशीतोष्ण और शीतोष्ण जलवायु वाले क्षेत्रों में की जाती है।
  • जीन क्षेत्रों में जल का अभाव होता है, उन क्षेत्रों में रिजका या लुसर्न की खेती कम होती है। यदि आप रिजका की खेती शुष्क जलवायु वाले क्षेत्रों में करते हैं, तो आपके पास सिंचाई के लिए पर्याप्त साधन होने आवश्यक है।
  • रिजका के लिए ठंडी एवं आद्र जलवायु अनुकूलित मानी जाती है।
  • रिजका की खेती 5 डिग्री सेल्सियस से 49 डिग्री सेल्सियस के तापमान में भी जा सकती है।
  • ज्यादातर रिजका या लुसर्न की बुवाई रबी के मौसम में की जाती है।

रिजका का बीज

  • यदि आप रिजका की खेती एक से डेढ़ एकड़ में कर रहे हैं, तो आपको लगभग 8 से 10 किलो बीज की आवश्यकता होती है।
  • रिजका या लुसर्न की बुवाई के लिए उन्नत किस्मों के बीजों का उपयोग करना चाहिए

रिजका की बुवाई

  • रिजका की बुवाई से पूर्व बीज में कवकनाशी मिलाकर बुवाई करनी चाहिए
  • बुवाई से पूर्व खेत में जुताई करके क्यारियां बनानी चाहिए
  • रिजका के बीज की बुवाई के लिए हाथों से बीज को क्यारियों के धोरों में फेंकना चाहिए या फिर सीड ड्रिल मशीन की सहायता से बुवाई करनी चाहिए।
  • रिजका या लुसर्न की बुवाई अक्टूबर से दिसंबर महीने के मध्य में की जाती है।
  • बुवाई करने के लिए मिट्टी के पीएच मान को अवश्य जांचें (pH 6.8)
  • बुवाई करने के लिए हमेशा उन्नत किस्मों का ही प्रयोग करें
  • उन्नत किस्मों की 20 से 22 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई करें
  • बीज की बुवाई सतह से25 सेंटीमीटर गहराई तक करें।
  • बुवाई से पूर्व पुरानी फसल के अवशेषों को अच्छे से नष्ट करें

सिंचाई

  • रिजका की खेती अधिकतर सिंचित स्थानों पर की जाती है, यहां पर इसकी उपज क्षमता अधिक होती है।
  • पौधे को उचित मात्रा में पानी मिलने पर पौधा हल्का हारे रंग रहता है। यदि फसल में पानी की कमी है तो पौधा गहरे हरे रंग का हो जाता है।
  • यदि पौधे की पत्तियों का रंग गहरा हरा हो रहा है, तो आपको तुरंत फसल में सिंचाई करने की आवश्यकता है। नहीं तो पौधे मुरझा सकते हैं।
  • यदि आप रिजका या लुसर्न की बुवाई गर्मी के मौसम में करते हो, तो सिंचाई का अवश्य ध्यान रखें फसल में प्रत्येक 10 से 20 दिनों के अंतराल में सिंचाई करते रहे।
  • यदि आप रिजका की फसल की बुवाई सर्दियों के मौसम में करते हो, तो प्रत्येक 15 से 20 दिन के अंतराल के पश्चात सिंचाई करें।
  • कार्बेंडाजिम कि 2 ग्राम मात्रा को 1 Kg बीज में मिलाकर बुवाई करें।

रिजका में खाद एवं उर्वरक

  • रिजका या लुसर्न की फसल में अधिक उपज प्राप्त करने के लिए और अच्छी फसल करने के लिए 20 किलोग्राम डीएपी, 20 किलोग्राम पोटाश प्रति एकड़ कि दर से फसल में डालें।
  • पोटाश फसल को अधिक उपज प्रदान करता है।
  • प्रत्येक कटाई के पश्चात 20 किग्रा यूरिया का इस्तेमाल करे।
  • फास्फोरस का उपयोग भी अवश्य करें क्योंकि फास्फोरस जड़ों के लिए फायदेमंद होता है।
  • फसल में लगभग 50-60 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर क्षेत्र में फास्फोरस डालें
  • इसके अलावा फसल में नत्रजन का भी उपयोग करें, क्योंकि छोटे पौधे की जड़े नत्रजन ग्रहण करने में सहायक होती है। इसलिए आपको रिजके के छोटे पौधों के लिए 25-30 किग्रा नत्रजन का उपयोग करें।

रिजका की फसल की निराई गुड़ाई

रिजका (Lucerne) की फसल में खरपतवार का ज्यादा प्रकोप देखने को मिलता है, इसलिए इसकी समय-समय पर निराई गुड़ाई करना आवश्यक है। निराई गुड़ाई हम कुदाल और मशीनों द्वारा नहीं कर सकते हैं, इसके लिए हमें उर्वरकों की सहायता ही लेनी पड़ती है।

रिजका की फसल में ज्यादातर मोथा, बथुआ, मटरी, चटरी, प्याजी, कृष्णनिल आदि जैसे खरपतवार बड़ी मात्रा में देखने को मिलते हैं। यदि आप रिजका की खेती पशुओं के चारे के लिए कर रहे हैं, तो इन खरपतवारों से ज्यादा नुकसान तो नहीं होता है, लेकिन फसल की उपज क्षमता में कमी आ जाती है।

  • रिजका या लुसर्न में अमरबेल का प्रकोप ज्यादातर देखने को मिलता है, इसलिए जिस खेत में अमरबेल प्रकोप देखने को मिलता है, उसमें रिजका नहीं बोहे
  • यदि फसल में अमरबेल का प्रकोप ज्यादा देखने को मिलता है, तो अमरबेल को फसल के साथ ही अलग कर लें और इधर-उधर ना बिखरे।
  • यदि खरपतवार ज्यादा है तो एक लिटर पानी में पैराक्वेट स्पर्श खरपतवारनाशी की 1 मिली लिटर मात्रा को घोलकर छिड़काव करना चाहिए । छिड़काव के 1-2 दिन बाद फसल में सिंचाई कर दे।
  • ध्यान रहे कि रिजका कि फसल के आस पास की फसल खरपतवारनाशी की चपेट में ना आए।

रिजका में रोग और उनकी रोकथाम

निम्न हमने रिजका की फसल में होने वाले प्रमुख रोग एवं रोकथाम के बारे में बताया है।

आसिता:-

यह रोग रिजका की फसल में शरद ऋतु में देखने को मिलता है। क्योंकि अधिक नमी होने के कारण यह रोग और ज्यादा सक्रिय हो जाता है।

इस रोग के कारण रिजका की पत्तियां खराब हो जाती है, इससे फसल सूखने लगती है।

रोकथाम:- रिजका या लुसर्न की फसल को इस रोग से बचाने के लिए मैन्कोजेब की 0.2 प्रतिशत मात्रा को पानी में घोलकर फसल में छिड़काव करना चाहिए।

इस दवा का छिड़काव फसल में 10 से 15 दिनों के अंतर के पश्चात करें ऐसे करते-करते आपको फसल में लगभग 2 से 3 बार इस दवा का छिड़काव करना है।

ध्यान रहे छिड़काव की गई फसल को लगभग 20 से 25 दिनों तक पशुओं को ना डालें।

रिजका की पत्तियों का पीला पड़ना

यदि रिजका या लुसर्न के पौधों की पत्तियां पीली पड़ रही है, तो आपको इसका तुरंत उपचार करना चाहिए क्योंकि यह फसल बर्बाद कर सकते हैं और ऐसे चारे को पशुओं को खिलाना भी हानिकारक हो सकता है।

रोकथाम:-  फसल के पत्ते पीले होने से बचाने के लिए कार्बोनडाज़िम की 12 प्रतिशत मात्रा और मैंकोजेब की 63 प्रतिशत मात्रा को 15 लीटर पानी में मिलाकर फसल में छिड़काव करें

इल्ली (कीट प्रजाति)

यह एक कीट है जो रिजका (Lucerne) की फसल की पत्तियों को खाना शुरू करता है, यह फसल को नष्ट करने में ज्यादा समय नहीं लगाता है। यह कीट पतियों को खाकर पौधे को सूखा देता है। जिससे फसल उत्पादन में कमी आ जाती है।

रोकथाम:-  रिजका की फसल को इस कीट से बचाने के लिए आपको इमामेक्टिन बेंजोएट की 10 ग्राम मात्रा को 15 लीटर पानी में घोलकर फसल में छिड़काव करें।

इसके अलावा यदि आप जैविक तरीके से इल्ली पर काबू पाना चाहते हैं तो आपको 2 किलोग्राम गुड़ को 5 लीटर पानी में घोलकर ब्यूवेरिया बेसियाना की 900 ml 150 लीटर पानी की मात्रा के साथ प्रति एकड़ कि दर से छिड़काव करें।

उकठा रोग

यह रोग फ्यूज़ेरियम कवक के कारण उत्पन्न होता हैं। इस रोग के कारण रिजका का पौधा पीला पड़ जाता है, और सूख जाता है।

यह रोग पौधे की जड़ों पर भी प्रभाव डालता है जिसके कारण पौधे की जड़ है गहरे रंग की हो जाती है।

रोकथाम:-  इस रोग से बचने के लिए आपको रिजका की रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली किस्मों का चयन करना है।

बुवाई से पूर्व बीज को उपचारित करें, फसल को उठा रोग से बचाने के लिए कार्बोनडाज़िम की 1 ग्राम मात्रा को 1 लीटर पानी में घोलकर फसल में छिड़काव करें।

रिजका की कटाई

रिजका की फसल अधिक मात्रा में प्राप्त करने के लिए फसल की पहली कटाई बुवाई के  55 से 60 दीनो पश्चात करनी चाहिए। एवं दुसरी कटाई 30 दिनों पश्चात करनी चाहिए ।

  • ध्यान रहे फसल की कटाई में ज्यादा देरी ना करें क्योंकि
  • देरी करने से फसल पीली पड़ जाती हैं। और फसल उत्पादन में कमी आ जाती है।
  • रिजका की दोबारा जल्दी वृद्धि के लिए फसल को 2-3 सेन्टीमीटर उपर से कटाई करें।।

रिजका की अच्छी किस्म से आप लगभग 8 कटाई से 800 क्विंटल चारा का उत्पादन कर सकते हैं। एवं लगभग 150 क्विंटल सुखा चारा प्राप्त कर सकते हैं।।

रिजका का इतिहास

प्राचीन काल से ही रिजका की खेती पश्चिमी देशों में अधिक मात्रा में की जाती थी। सन् 1900 से भारत में रिजका की खेती होना शुरू हुई थी । इससे पहले ईरान और अफगानिस्तान के निकटवर्ती पश्चिमी एशियाई देशों में रिजका की खेती की जाती थी।वर्तमान समय में रिजका की खेती भारत समेत रूस, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस आदि देशों में की जाती है। रिजका एक मध्य एशियाई पौधा है और वैज्ञानिको के सूत्रों के मुताबिक रिजका की उत्पत्ति ट्रांसकाकेशिया नामक एशियाई देश में हुई थी। सूत्रों के मुताबिक इसका मूल स्थान ईरान देश हो सकता है। परंतु इसमें कितनी सच्चाई है, यह कोई नहीं जानता मगर यह जरूर सत्य है कि इसकी उत्पत्ति एशियाई देशों में हुई थी।

रिजका की खेती कौन से राज्य में होती है?

भारत देश में लगभग सभी राज्यों में रिजका या लुसर्न की खेती पशुओं के चारे के लिए की जाती है। क्योंकि रिजका या लुसर्न पशुओं के लिए प्रोटीन युक्त और पौष्टिक है। भारत देश में मुख्य रूप से रिजका की खेती उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, गुजरात और तमिलनाडउ आदि राज्यों में की जाती है भारत में सबसे ज्यादा रिजका की खेती उत्तर प्रदेश राज्य में की जाती है, वही हरियाणा, राजस्थान दूसरे व तीसरे नंबर पर आते हैं।

कितनी पैदावार होती है?

दुनिया भर में रिजका या लुसर्न की खेती व्यापारिक स्तर पर की जाती है। यह चारे की प्रमुख फसल है, इसलिए इसका उपयोग पशुओं के हरे चारे के रूप में किया जाता है। और इसकी फसल से बीज भी प्राप्त किया जाते हैं। यह अधिक उत्पादन देने वाली फसल है। क्योंकि इसकी एक बार बुवाई करने से हम 2 से 3 साल तक इसकी कटाई कर सकते हैं।

भारत में रिजका या लुसर्न का उत्पादन अधिक मात्रा में किया जाता है और उत्तर भारत में लगभग 700 से 800 क्विंटल प्रति हेक्टेयर एवं दक्षिण भारत में 800-900 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से रिजका का उत्पादन किया जाता है।

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FAQ

  1. 1 रिजका की खेती कब की जाती है?

Ans – भारत में रिजका (Lucerne) की खेती अक्टूबर से दिसंबर महीने के मध्य में की जाती है। रिजका की खेती

  1. 2 रिजका कोनसी फसल है?

Ans – रिजका (Lucerne) प्रोटीन युक्त पौष्टिक हरे चारे की फसल है। यह फसल दुधारू पशुओं के लिए काफी ज्यादा उपयोगी है। एवं रिजका रबी की फसलों में प्रमुख स्थान रखती है।

  1. 3 रिजका का वनस्पति नाम क्या है?

Ans – रिजका की फसल का वनस्पति नाम मेडिकैगो सैटिवा (Medicago sativa) है।

  1. 4 रिजका का प्रमुख रोग क्या है?

Ans – रिजका की फसल में ज्यातर इल्ली, असिता, उखटा जैसे रोग देखने को मिलते हैं। यह रोग फसल को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाते है जिससे फसल की उत्पादन क्षमता में कमी आ जाती है।

  1. 5 रिजका की बुवाई कैसे करें?

Ans – रिजका की बुवाई करने के लिए आपको भुमी को तैयार करके क्यारिया बनाकर और बिज को अच्छे से उपचारित करके बुवाई करनी चाहिए । बुवाई करने से पूर्व बिज के साथ कवकनाशी मिलाकर बुवाई करनी चाहिए।

About Vinod Yadav

My name is Vinod Yadav and I am from Haryana. Although I do a job, but I am fond of writing. This blogging starts from here again. I belong to a farming family, so I have a good knowledge of agriculture. I am also an engineer in textile, so the market and plans are also taken care of. There's just one drawback. Bless you all. Hope to keep it. Jai Hind, Jai Jawan - Jai Kisan

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