परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY): देश में किसानों की आय दोगुनी करने और रसायनों से खराब हो रही जमीन को बचाने के लिए केंद्र सरकार जैविक खेती (Organic Farming) को बढ़ावा देने पर सबसे ज्यादा जोर दे रही है। इसी विजन के तहत सरकार परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) चला रही है। यह योजना उन किसानों के लिए एक बहुत बड़ा सहारा है जो यूरिया और डीएपी (DAP) का भारी खर्च छोड़कर प्राकृतिक खेती की तरफ कदम बढ़ाना चाहते हैं।
आइये किसान योजना के इस आर्टिकल में किसान भाइयों आपको बताते है की यह योजना क्या है, इसमें कितना पैसा मिलता है और आप इसका लाभ कैसे उठा सकते हैं।
परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) क्या है?
सबसे पहले तो आपको इस योजना के बारे में थोड़ी जानकारी दे देते है की कब शुरू हुई और किसने शुरू की आदि। देखिये किसान भाइयो यह केंद्र सरकार द्वारा साल 2015 में शुरू की गई एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना है जो सॉइल हेल्थ मैनेजमेंट (Soil Health Management) के तहत काम करती है। इसका मुख्य उद्देश्य देश के ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान को मिलाकर केमिकल-फ्री (जैविक) खेती को बढ़ावा देना है। इस योजना के जरिए सरकार किसानों को जैविक खेती की ट्रेनिंग से लेकर, खाद खरीदने, पैकिंग करने और फसल को बाजार में ऊंचे दामों पर बेचने तक हर कदम पर आर्थिक मदद (Financial Help) देती है।
परंपरागत कृषि विकास योजना में कितना और कैसे मिलता है पैसा?
PKVY के तहत सरकार किसानों को प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये की वित्तीय सहायता तीन साल की अवधि के लिए प्रदान करती है। इस बजट को सरकार ने दो मुख्य भागों में बांटा है ताकि किसानों को कोई दिक्कत न हो। आइये आपको उन दोनों भागों के बारे में भी जानकारी दे देते है –
सीधे किसान के खाते में (₹31,000): इस कुल राशि में से 31,000 रुपये सीधे किसानों के बैंक खातों में (DBT के जरिए) भेजे जाते हैं। इस पैसे का इस्तेमाल किसान जैविक बीज, बायो-फर्टिलाइजर (गोबर-केंचुआ खाद), जीवामृत बना ने के ड्रम और प्राकृतिक कीटनाशक खरीदने के लिए करते हैं।
मार्केटिंग और ब्रांडिंग के लिए (₹19,000): बाकी बचे 19,000 रुपये का उपयोग किसानों की फसल की वैल्यू एडिशन (Value Addition), पैकेजिंग, ब्रांडिंग, जैविक प्रमाणीकरण (Organic Certification) और फसल को बड़े शहरों के बाजारों तक पहुंचाने (Marketing) के लिए किया जाता है।
क्लस्टर दृष्टिकोण’ (Cluster Approach) इस योजना का असली सीक्रेट है
PKVY योजना का लाभ किसी एक अकेले किसान को नहीं बल्कि किसानों के समूह (Cluster) को दिया जाता है। सरकार के नियमों के मुताबिक
जैविक खेती शुरू करने के लिए कम से कम 20 या उससे ज्यादा किसानों का एक ग्रुप होना चाहिए। इसके अलावा इस ग्रुप के पास कुल मिलाकर कम से कम 50 एकड़ (यानी लगभग 20 हेक्टेयर) कृषि भूमि होनी चाहिए तभी इसका लाभ मिलता है।
इस क्लस्टर एप्रोच का फायदा यह होता है कि सभी किसान मिलकर अपनी फसल की बड़ी खेप तैयार कर सकते हैं जिससे परिवहन (Transportation) का खर्च बचता है और खरीदार सीधे खेत पर आकर ऊंची कीमत पर फसल खरीद लेते हैं।
मुफ्त ऑर्गेनिक सर्टिफिकेट (PGS Certification)
जैविक खेती करने वाले किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि वे बाजार में कैसे साबित करें कि उनकी फसल शुद्ध है। बिना सर्टिफिकेट के कोई भी बड़ी कंपनी या अमीर ग्राहक अच्छे दाम नहीं देता। PKVY योजना के तहत सरकार क्लस्टर के सभी किसानों को PGS (Participatory Guarantee System) के जरिए बिल्कुल मुफ्त में ऑर्गेनिक सर्टिफिकेट दिलाती है जिसकी बाजार में बहुत बड़ी वैल्यू है।
आवेदन कैसे करें और कौन से दस्तावेज हैं जरूरी?
अगर आपके क्षेत्र के किसान मिलकर इसका लाभ उठाना चाहते हैं तो वे अपने जिले के कृषि विभाग के कार्यालय (Agriculture Department Office) या नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) में जाकर जिला कृषि अधिकारी (DAO) से संपर्क कर सकते हैं।
जरूरी दस्तावेज की अगर बात करें तो किसान भाइयो इसमें सभी किसानों का आधार कार्ड और निवास प्रमाण पत्र लगाया जाट है। इसके अलावा
जमीन के कागजात (खतौनी/जमीन की नकल), बैंक पासबुक की कॉपी (जिसमें सब्सिडी का पैसा आएगा) और किसानों के समूह (क्लस्टर) का एक सामूहिक पंजीकरण फॉर्म भरना होता है वो लगने वाला है।
किसान भाइयों उम्मीद है की आपको केंद्र सरकार के द्वारा चलाई जा रही इस परंपरागत कृषि विकास योजना के बार में पूरी जानकारी मिल गई होगी। फिर भी अगर आपके मन में इस योजना को लेकर कोई सवाल है तो आप हमसे सम्पर्क पेज के जरिये सवाल पूछ सकते है। किसान योजना की टीम आपके हर सवाल का जल्द से जल्द जवाब देने की कोशिश करेगी।
