जैविक खेती (Organic Farming): आज के दौर में जब हर तरफ कैंसर और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है तो ऐसे में लोग अपने खान-पान को लेकर बेहद सतर्क हो गए हैं। यही वजह है कि बाजार में बिना केमिकल और बिना यूरिया के उगने वाले अनाज, फल और सब्जियों की मांग और उनके दाम आसमान छू रही है। अगर आप एक किसान हैं या खेती-किसानी में रुचि रखते हैं तो जैविक खेती (Organic Farming) आपके लिए घाटे के सौदे को मुनाफे में बदलने का सबसे बड़ा जरिया बन सकती है। आइए किसान योजना के इस आर्टिकल के जरिये समझते हैं कि यह क्या है और इससे कमाई कैसे होती है।
जैविक खेती (Organic Farming) क्या है?
किसान भाइयो सरल भाषा में कहें तो जैविक खेती का मतलब है प्रकृति के नियमों के साथ खेती करना। यह खेती की एक ऐसी प्राचीन और वैज्ञानिक पद्धति है जिसमें यूरिया, डीएपी (DAP), जहरीले कीटनाशकों (Pesticides) और केमिकल वाले हाइब्रिड बीजों का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया जाता। इसकी जगह मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को बढ़ाने के लिए गोबर की खाद, केंचुआ खाद (वर्मीकंपोस्ट), हरी खाद और नीम के अर्क जैसे प्राकृतिक साधनों का उपयोग किया जाता है।
इसकी खेती में किसी भी प्रकार का कोई केमिकल इस्तेमाल नहीं होता है और ना ही किसी भी प्रकार के कीटनाशकों, उर्वरकों का इस्तेमाल किया जाता है। यहां तक की इसके भण्डारण को भी पारम्परिक तरीके से ही किया जाता है ताकि किसी भी केमिकल की चपेट में ये आने से बच सके। आज के समय में लोगो आर्गेनिक फार्मिंग की और काफी अधिक आकर्षित हो रहे है क्योंकि रोज रोज होने वाले शरीर नुकसान से देश का हर एक नागरिक परेशान हो रहा है। केमिकल युक्त अनाज और फल तथा सब्जियों के रोजाना के आहार से जनमानस परेशान है।
जैविक खेती (Organic Farming) कैसे की जाती है?
जैविक खेती करने का तरीका बेहद पारंपरिक और वैज्ञानिक है और हमारे बड़े बुजुर्गों ने हमेशा आर्गेनिक खेती ही की है। ये तो समय बदला और पिछले कुछ वर्षों में अचानक से कीटनाशकों और उर्वरकों की बाजार में बाढ़ सी आ गई है जिसने हमारे हजारों सालों की प्राकृतिक खेती को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। किसान भाइयो इसकी खेती करना बहुत ही आसान है और कोई भी किसान या फिर यूँ कहें की कोई भी नागरिक इसकी खेती कर सकता है।
इसकी खेती करने के लिए सबसे पहले मिट्टी से शुरुआत करनी होती है क्योंकि खेती की मिट्टी में भी किसी भी प्रकार का कोई केमिकल इस्तेमाल नहीं करना होता है। अपने खेत में केमिकल की जगह पर आपको प्रति एकड़ में 4-5 ट्रॉली अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट डालना होता है। फसलों को कीड़ों से बचाने के लिए देसी गाय के गोबर, गोमूत्र, बेसन, गुड़ और पीपल के पेड़ के नीचे की मिट्टी को मिलाकर जीवामृत (इसको कैसे बनाये – यहां देखें) तैयार किया जाता है जो खाद और कीटनाशक दोनों का काम करता है।
खेत में लगातार एक ही फसल नहीं उगाई जाती। दलहन (दालें) और तिलहन की फसलें बीच-बीच में उगाने से मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा प्राकृतिक रूप से बनी रहती है। ये नाइट्रोजन फसलों के बहुत काम आती है और फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों को बढ़ाने का काम करती है। इसके अलावा किसान भाइयो सूखी घास या पत्तों से मिट्टी को ढक दिया जाता है जिससे नमी बनी रहती है और खरपतवार (घास-फूस) नहीं उगती। खरपतवार नहीं उगती है तो उसको नियंत्रित करने के कीटनाशकों के इस्तेमाल की भी जरुरत नहीं होती है और थोड़ी बहुत खतपतवार हटानी भी होती है और उसको हटाने के लिए निराई गुड़ाई के जरिये उसको पूरा किया जाता है।
जैविक खेती (Organic Farming) कौन-कौन कर सकता है?
वैसे तो किसान भाइयो इस आर्टिकल में इस सवाल को नहीं होना चाहिए लेकिन फिर भी आपको बता दें की देश का कोई भी नागरिक जैविक खेती को कर सकता है और इसकी खेती करने के लिए किसी भी प्रकार की डिग्री की जरुरत नहीं होती है। कोई भी किसान फिर वो छोटा हो या बड़ा इसकी खेती कर सकता है। आज के समय में लोग लीज पर जमीन लेकिन इसकी खेती कर रहे है और इतना ही नहीं बल्कि शहरों में तो लोग अपनी छतों पर भी इसकी छोटे स्तर पर खेती करते है जो की उनके परिवार के लिए पर्याप्त होती है।
शहरों के युवा और गृहणियां हाइड्रोपोनिक्स या टेरेस (छत) पर ऑर्गेनिक सब्जियां उगाने का काम कर रही है और वे उसको पूरी तरह से जैविक तरीके से कर रही है। यानि कुल मिला जैविक खेती कोई भी कर सकता है और कभी भी इसकी शुरआत की जा सकती है।
जैविक खेती के बड़े फायदे क्या हैं?
जैविक खेती की शुरुआत आप कर रहे हो तो आपको बता दें की इससे आपको बहुत अधिक देदे मिलने वाले है फिर चाहे स्वास्थ की दॄष्टि से देखें या फिर कमाई की नजर से देखें दोनों ही में आपको काफी लाभ मिलने वाला है। यहां हम आपको इससे होने वाले 4 बड़े फायदे बता रहे है देखिये –
- लागत में भारी कमी: बाजार से महंगे यूरिया, डीएपी और कीटनाशक खरीदने का खर्च 90% तक बच जाता है क्योंकि जैविक खेती में इनका इस्तेमाल नहीं किया जाता।
- मिट्टी की सेहत में सुधार: जमीन बंजर होने से बच जाती है और मिट्टी में केंचुओं व मित्र कीटों की संख्या बढ़ती है। धीरे धीरे आपकी जमीन की उर्वरक शक्ति में काफी सुधार देखने को मिलता है और जमीन पहले से कहीं अधिक उपजाऊ बन जाती है।
- पानी की बचत: जैविक खाद वाली मिट्टी की जल धारण क्षमता अधिक होती है जिससे सिंचाई के लिए 30-40% कम पानी लगता है।
- सेहत के लिए वरदान: यह अनाज पूरी तरह केमिकल-फ्री होता है जिससे खाने वाले को कैंसर, डायबिटीज जैसी बीमारियां नहीं होतीं। सेवह के नजरिये से जैविक खाद सामग्री का इस्तेमाल मानवता के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
जैविक खेती में शुरआत में आने वाली चुनौतियां
किसान भाइयों जैविक खेती की शुरआत आप कर रहे है तो शुरुआत के 2 – 3 साल आपको कुछ चुनौती का सामना भी करना पड़ेगा क्योंकि आप जिस जमीन में आर्गेनिक फार्मिंग करने जा रहे है उसमे पहले से ही सालों से यूरिया और कीटनाशकों का इस्तेमाल होता आ रहा होगा तो अचानक से उस जमीन की गुणवत्ता में परिवर्तन नहीं आता है रो उसको सही होने में 2 से 3 साल का समय लग जाता है। इस दौरान आके खेत में पैदावार काफी कम हो जाती है।
इसके अलावा किसान भाइयों आपको शारीरिक मेहनत जैविक खेती में अधिक करनी पड़ती है क्योंकि खरपतवार हो या फिर कोई भी अन्य समस्या, उसके समाधान के लिए आपको शारीरिक मेहनत अधिक करनी होती है। इसके अलावा आपकी ऑर्गनिक फसल के लिए आपको ऑर्गनिक सर्टिफिकेट लेना होता है जिसको लेने का प्रोसेस काफी लम्बा है और उसमे काफी वक्त लगता है।
किसान जैविक खेती (Organic Farming) से बंपर कमाई कैसे कर सकते हैं?
आज के समय में किसान भाई अपनी पारम्परिक खेती को ही जैविक खेती में ढालने का काम कर रहे है और इससे उनकी कमाई में 2 से 3 गुना की वृद्धि देखि जा रही है। ऑर्गनिक खेती करके अगर आपको भी अपनी कमाई में वृद्धि करनी है तो किसान भाइयों इसके लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा जो की यहां निचे हम बताने जा रहे है।
- प्रीमियम कीमत (Premium Pricing): बाजार में सामान्य गेहूं अगर 25 रुपये किलो बिकता है तो अच्छी क्वालिटी का प्रमाणित ऑर्गेनिक गेहूं 50 से 70 रुपये किलो तक आसानी से बिक जाता है। सब्जियों और फलों में यह अंतर और भी ज्यादा होता है। इसका मतलब ये हुआ की जैविक खेती में आगरा आपके खेत में पैदावार थोड़ी कम भी होती है तो भी आपकी कमाई में कमी नहीं आएगी बल्कि कमाई और अधिक बाढ़ जाती है।
- सीधी बिक्री (Direct to Consumer – D2C): बिचौलियों को बेचने के बजाय किसान शहरों में रहने वाले जागरूक परिवारों, वाट्सएप ग्रुप्स या अपनी छोटी वेबसाइट/ऐप बनाकर सीधे घरों तक सब्जियां और अनाज पहुंचा सकते हैं। इससे बिचौलियों के जरिये जो कमिसन लिया जाता है वो भी किसान के पास में ही आएगा और इससे भी उनकी कमाई में बढ़ौतरी होती है।
- वैल्यू एडिशन (Value Addition): सिर्फ जैविक सरसों बेचने के बजाय उसका शुद्ध कच्ची घानी तेल निकालकर बोतल में पैक करके बेचें। जैविक मिर्च को सुखाकर उसका पाउडर बेचें। इससे मुनाफा 300% तक बढ़ जाता है। ऐसी प्रकार से सब्जियों को और फलों को भी आप पैकिंग कर बेच सकते है और अपनी कमाई को बढ़ा सकते है।
- सरकारी योजनाओं का लाभ: सरकार परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) (ये योजना क्या है यहां पढ़ें) के तहत जैविक खेती शुरू करने के लिए प्रति हेक्टेयर हजारों रुपये की सब्सिडी, ट्रेनिंग और मुफ्त ऑर्गेनिक सर्टिफिकेट देती है। किसान इसका लाभ उठाकर अपनी जेब से लगने वाला पैसा बचा सकते हैं।
तो किसान भाइयों उम्मीद है आपको जैविक खेती के बारे में डिटेल में जानकारी इस आर्टिकल में मिल गई होगी और अगर आपको जैविक खेती से जुडी किसी भी प्रकार की अन्य कोई जानकारी चाहिए तो आप हमे सम्पर्क पेज के जरिये किसी भी समय सम्पर्क कर सकते है और किसान योजना की तर्ज से आपको उसकी जानकारी उपलब्ध करवाई जाएगी।
