Jeevamrut: यूरिया-डीएपी को भूल जाइए, घर पर ऐसे बनाएं शक्तिशाली जीवामृत, फसलों की पैदावार बढ़ाने का अचूक देसी फॉर्मूला

Written by: Kumar Vinod

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किसान भाइयो आपके घर में ही देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से तैयार होने वाला जीवामृत मिट्टी के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। जानिए ड्रम में इसे बनाने की स्टेप-बाय-स्टेप विधि, सामग्री की सही मात्रा और इस्तेमाल का तरीका ताकि आप इसको अपनी जैविक खेती में इस्तेमाल कर सकते और अपने खेतों में पैदावार को बढ़ाने के साथ साथ में अपनी फसल की गुणवत्ता में भी सुधार कर सके।


जीवामृत (Jeevamrut): आज के समय में रासायनिक खादों (Chemical Fertilizers) की बढ़ती कीमतों और उनसे बंजर होती जमीन ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में जीवामृत (Jeevamrut) एक ऐसा जादुई विकल्प बनकर उभरा है जो मिट्टी में मौजूद करोड़ों मित्र बैक्टीरिया (केंचुओं और सूक्ष्मजीवों) को दोबारा सक्रिय कर देता है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसे बनाने की लागत लगभग शून्य (Zero Cost) है। आज के समय में सभी किसान भाइयों को इसको तैयार करके अपने खेतो में इस्तेमाल करना चाहिए। आइये किसान योजना पर आपको इस आर्टिकल में हम जीवामृत कैसे बनाया जाता है इसके बारे में डिटेल में जानकारी देते है।

किसान भाइयों अगर आप अपने एक एकड़ खेत के लिए जीवामृत बनाना चाहते है या फिर अधिक खेती के लिए बनाने का प्लान कर रहे है तो ये आर्टिकल आपके लिए बहुत ख़ास होने वाला है क्योंकि इसमें हम आपको एक एकड़ के लिए जो 200 किलोग्राम जीवामृत बनाया जाता है उसको बनाने का विवरण तो देंगे ही साथ में आपको उसमे इस्तेमाल होने वाली सामग्री और जरुरी बातें भी बताने वाले है।

जीवामृत बनाने का सबसे सटीक और वैज्ञानिक तरीका क्या है?

सबसे पहले आपको जीवामृत बनाने के लिए जरूरी सामग्री (1 एकड़ के लिए) के बारे में बताते है। देखिये इसके लिए आपको बाजार में जाकर कुछ भी लेने की जरुरत नहीं है और सब कुछ आपको अपने गांव में ही और घर में ही मिल जायेगा। देखिये कौन कौन सी चीज की आपको जरुरत होने वाली है जीवामृत तैयार करने के लिए –

  • पानी 200 लीटर (एक बड़े प्लास्टिक के ड्रम में) आपको लेना होगा।
  • देसी गाय का ताजा गोबर करीब 10 किलोग्राम
  • देसी गाय का गोमूत्र आपको 5 से 10 लीटर लेना होगा।
  • गुड़ भी आपको 1 से 2 किलोग्राम लेना है और काला या पुराना गुड़ जो आसानी से घुल जाए तो सबसे अच्छा होगा।
  • बेसन या किसी भी दाल का आटा 1 से 2 किलोग्राम लेना है जिसमे चना, अरहर, मूंग या उड़द का आटा भी चलेगा।
  • सजीव मिट्टी मुट्ठी भर लेनी है यानि किसी पुराने बरगद या पीपल के पेड़ के नीचे की मिट्टी जहां कभी केमिकल न डाला गया हो वो लेनी है।

जीवामृत (Jeevamrut) बनाने की विधि

किसान भाइयों जीवामृत (Jeevamrut) को बनाने में आपको 4 से 5 दिन का समय लगने वाला है लेकिन इसको बनाने की जो विधि है वो बहुत ही सरल है और आसानी से आप इसको बना सकते है। देखिये आपको क्या क्या करना है।

सबसे पहले आपको जीवामृत (Jeevamrut) बनाने के लिए 200 लीटर के प्लास्टिक ड्रम को पानी से भर लेना है। इसके बाद एक अलग से बाल्टी में आपको 10 किलो गोबर और थोड़े से पानी को मिलाकर एक स्मूथ पेस्ट (घोल) बनाना है और उसे ड्रम के पानी में डाल देना है। इसके बाद में आपको इसके बाद ड्रम में 5-10 लीटर गोमूत्र डालें। फिर पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे से लाई गई मुट्ठी भर मिट्टी को भी इसमें मिला दें।

ये सब करने के बाद में अब आपको 1-2 किलो गुड़ और 1-2 किलो बेसन को अलग से थोड़े पानी में घोल लें ताकि उसमें गांठें न पड़ें। इस घोल को भी ड्रम के अंदर डाल दें। (गुड़ और बेसन ड्रम के बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करते हैं जिससे उनकी संख्या करोड़ों गुना बढ़ जाती है)। अब एक लंबे लकड़ी के डंडे की मदद से पूरे मिश्रण को घड़ी की सुई की दिशा में (Clockwise) अच्छी तरह से 2-3 मिनट तक हिलाएं।

किसान भाइयों अब ड्रम के मुंह को किसी जूट की बोरी (टाट के बोरे) या सूती कपड़े से ढक दें। ड्रम को हमेशा किसी छायादार जगह पर या पेड़ के नीचे रखें जहां सीधी धूप न पड़ती हो। अगले 3 से 4 दिनों तक रोजाना सुबह और शाम को डंडे से इस मिश्रण को 2-2 मिनट के लिए घुमाना है। 4 से 5 दिनों के भीतर आपका शक्तिशाली जीवामृत पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएगा। (गर्मियों में यह 4 दिन और सर्दियों में 6-7 दिन ले सकता है)।

जीवामृत (Jeevamrut) को फसलों में कैसे इस्तेमाल करें?

किसान भाइयों आपने जीवामृत (Jeevamrut) तो बना लिया है लेकिन उसको अपनी फसलों में कैसे इस्तेमाल करना है इसकी जानकारी भी आपको होनी चाहिए ही जरुरी है। देखिए इसको इस्तेमाल करना बहुत ही आसान है और आपको यहां इसके बारे में समझ सकते है। देखिये सबसे पहले आपको सिंचाई के समय से इसकी शुरुआत अपने खेत में करनी होती है।

पानी के साथ सिंचाई के दौरान इसको इस्तेमाल कर सकते है। जब आप खेत में पानी लगा रहे हों तो मुख्य नाली जिनको धोरे भी कहते है, के पास इस ड्रम को रख दें और नीचे एक छोटा छेद या टोंटी लगा दें। पानी के बहाव के साथ-साथ यह बूंद-बूंद करके पूरे खेत में प्राकृतिक रूप से फैल जाएगा।

इसके अलावा किसान भाइयो सब्जियों और फसलों पर छिड़काव (Spray) भी इसका किया जा सकता है। अगर आप खड़ी फसल पर स्प्रे करना चाहते हैं तो जीवामृत को किसी महीन कपड़े से 2-3 बार अच्छी तरह छान लें ताकि पंप की नोजल न फंसे। 10 लीटर पानी में 1 लीटर जीवामृत मिलाकर फसलों पर छिड़काव करें। इससे आपकी फसल में काफी अधिक लाभ मिलता है।

जीवामृत (Jeevamrut) बनाने के बाद जरूरी सावधानियां

किसान भाइयो जीवामृत को बनाने के 7 से 10 दिनों के भीतर इस्तेमाल कर लेना चाहिए क्योंकि इसके बाद इसमें मौजूद बैक्टीरिया कम होने लगते हैं। जीवामृत (Jeevamrut) जिस ड्रम में तैयार कर रहे है उस ड्रम को कभी भी आप लोहे या फिर स्टील का इस्तेमाल ना करे और हमेशा ये ध्यान रखें की प्लास्टिक का ड्रम हो। इसके अलावा आपको ये भी ध्यान रखना है किसान भाइयों की ड्रम को कभी भी आपको तेज धुप में या फिर सीधी धुप में नहीं रखना है नहीं तो उसके बैक्टीरिया ख़त्म होने का खतरा रहता है।

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