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ओले गिरने से 35,600 हेक्टेयर में खड़ी 2.13 अरब की फसल नष्ट, किसान हुए बर्बाद

ओलावृष्टि के कारण किसानो का काफी नुकसान हो चूका है। किसानो ने कर्ज लेकर फसल बोई थी लेकिन मौसम की मार की वजह से उनकी हालत काफी खराब हो चुकी है।

पश्चिमी राजस्थान में हुई भारी ओलावृष्टि के कारण किसानो की इसबगोल की अरबो रूपये की फसल ख़राब हो गई है। इसमें बाड़मेर, जालोर जिले शामिल है। इसमें लाखो किसान ऐसे है जिन्होंने इसबगोल की फसल की हुई थी जो की ओलावृष्टि के कारण पूरी तरह से मिटटी में मिल चुकी है। अब किसानो की आस सरकार से है की वो उनके लिए मुवावजा राशि जारी करे और उनको कर्ज से थोड़ी राहत मिले।

भारत में सबसे अधिक जीरे और इसबगोल का उत्पादन करने वाले जिले जालोर में ओलावृष्टि के कारण करोड़ो रूपये की फसल बर्बाद हुई है। जालोर के आसपास के क्षेत्र सांचोर , चितलवाना, रानीवाड़ा में भी काफी नुकसान हुआ है सबसे अधिक नुकसान इसबगोल की फसल में हुआ है। जालोर में करीब 35000 हेक्टेयर जमीन पर इसबगोल की खेती की गई थी जो की ओलावृष्टि के कारण पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। वही सरसो और जीरा की फसल में भी 40 प्रतिशत तक का नुकसान हुआ है

आईये जानते है अरबो रूपये का नुकसान कैसे हुआ है

मार्किट में इसबगोल का भाव 15000 हजार रूपये प्रति किवंटल के आसपास होता है। तो पश्चिमी राजस्थान के जालोर, बाड़मेर और अन्य जिलों में 35600 हेक्टेयर पर इसबगोल की खेती किसानो ने की हुई थी। और प्रति हेक्टेयर इसबगोल का उत्पादन लगभग पांच किवंटल के करीब होता है। तो 35600 हेक्टेयर जमीन के हिसाब से एक लाख 78 हजार किवंटल फसल इसबगोल का उत्पादन होने वाला था। और अभी ओलावृष्टि के कारण लगभग 1 लाख 42 हजार किवंटल फसल ख़राब हो गई है। तो 15000 रु प्रति किवंटल के भाव से अगर देखा जाये तो करीब 2 अरब की इसबगोल की फसल ओलावृष्टि के कारण मिटटी में मिल चुकी है।

टीम ने किया सर्वे

कृषि विभाग की टीम ने जालोर में जाकर खेतो का निरिक्षण किया है। इसमें लगभग 90 प्रतिशत फसल नष्ट हो चुकी है। किसानो ने कर्ज लेकर इस फसल को बोया था जो की अब उनके लिए मुशीबत बन चूका है। अब किसान सरकार से आस लगा कर बैठे है यदि सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं होती है तो किसान की हालत बहुत ख़राब हो जाएगी। कर्ज में डूब जायेंगे। इसके लिए जिला अध्यक्ष सुनील शाहू ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। और किसानो को ओलावृष्टि के कारण ख़राब हुए फसल का उचित मुवावजा देने की मांग की है।

Vinod Yadav

विनोद यादव हरियाणा के रहने वाले है और इनको करीब 10 साल का न्यूज़ लेखन का अनुभव है। इन्होने लगभग सभी विषयों को कवर किया है लेकिन खेती और बिज़नेस में इनकी काफी अच्छी पकड़ है। मौजूदा समय में किसान योजना वेबसाइट के लिए अपने अनुभव को शेयर करते है। विनोद यादव से सम्पर्क करने के लिए आप कांटेक्ट वाले पेज का इस्तेमाल कर सकते है।

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