रामलला के दरबार में दुनिया पहुंचा मियाज़ाकी, कीमत ₹3 लाख प्रति किलो, अयोध्या की धरती पर किसान ने किया कमाल
Miyazaki mango Ayodhya Ram Mandir: आज अयोध्या में प्रभु श्री राम लाला के दरबार में एक ऐसा अनूठा प्रसाद पहुंचा जिसकी चर्चा देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी हो रही है। किसान भाइयों कृषि और व्यापार में इसकी चर्चा अभी से होने लगी है क्योंकि जो आम प्रसाद के रूम में रामलला के दरबार में आया है उसकी कीमत अंतर्राष्ट्रीय मार्किट में इस समय लगभग ढाई से तीन लग रूपये पार्टी किलोग्राम बताई जा रही है।
जिस आम को किसान ने रामलला के दरबार में पेश किया है वो जापान का मियाज़ाकी किस्म का आम है को की भारत में उगाना दुर्लभ माना जाता है। इस आम को एग ऑफ़ द सन यानि सूर्य का अंडा भी कहा जाता है। किसान ओमप्रकाश सिंह ने अपनी फली फसल के इन आम को पूरी परम्परा के साथ में अपने प्रभु श्रीराम के चरणों में अर्पित किया है।
अयोध्या की पवित्र मिट्टी में उपजा
किसान भाइयो आपकी जानकारी के लिए बता दें की जापान की इस किस्म के आम को अयोध्या की मिटटी में ही पैदा किया गया है और इसके पीछे भी एक रोचक कहानी है।
दरअसल किसान किसान ओमप्रकाश सिंह ने दो साल पहले प्रयोग के तौर पर मियाज़ाकी आम का पौधा अपने बाग में रोपा था। उनका मुख्य उद्देश्य यह जांचना था कि क्या जापान का यह संवेदनशील और बेहद महंगा पेड़ अयोध्या की जलवायवीय परिस्थितियों (Climatic Conditions) को सहन कर पाएगा।
किसान ओमप्रकाश के मुताबिक पेड़ ने स्थानीय पर्यावरण के साथ बहुत शानदार तालमेल बिठाया और इस सीजन में पेड़ पर लगभग एक दर्जन फल आए जिनमें से प्रत्येक का वजन 150 ग्राम से 300 ग्राम के बीच है। इस कीमती फल की खासियत इसका गहरा लाल-बैंगनी रंग और बेमिसाल मिठास है। किसान भाइयो अगर इसके एक फल की कीमत का आंकलन करे तो लगभग 1 लाख कीमत का एक फल है।
विटामिंस का खजाना है ये आम
अभी हाल ही में समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बातचीत में किसान ओमप्रकाश ने बताया की मियाजाकी आम अपनी अत्यधिक मिठास, शून्य के बराबर फाइबर (रेशा) और प्रचुर मात्रा में विटामिंस के लिए जाना जाता है। उन्होंने अपनी कृषि यात्रा साझा करते हुए कहा कि हमारी सनातनी परंपरा है कि जब भी बाग या खेत में पहली फसल पकती है तो उसे गुरु के माध्यम से भगवान को अर्पित किया जाता है और उन्होंने भी ऐसा ही किया और अपनी पहली फसल को रामलला के चरणों में अर्पित किया है।
ओमप्रकाश बताते है की उनका बाग केवल मियाज़ाकी तक सीमित नहीं है बल्कि उनके पास थाईलैंड का बनाना मैंगो, ऑस्ट्रेलिया का R2E2 और भारत के सदाबहार चौंसा और दशहरी समेत कई स्वदेशी प्रजातियों का बेहतरीन संग्रह है।
सूर्य देव की आभा जैसा है इसका रंग - मंदिर के महंत सीताराम दास
ओमप्रकाश सिंह के इस खास बगीचे का दौरा करने पहुंचे महंत सीताराम दास जी महाराज ने इस कृषि उपलब्धि की जमकर सराहना भी की है। उन्होंने कहा कि आम को फलों का राजा माना जाता है और अयोध्या की धरती पर दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित आम का पैदा होना बेहद सौभाग्य की बात है। मियाज़ाकी के अनूठे स्वरूप को निहारते हुए महंत जी ने कहा कि इस फल का चमकीला रंग ब्रह्मांड को आलोकित करने वाले सूर्य देव के समान दीप्तिमान है।
सूर्य देव पूरे संसार को रोशनी देते हैं और फलों के राजा मियाज़ाकी में भी वही चमक दिखती है। भगवान की कृपा से यह तो बस शुरुआत है और आने वाले समय में यहां ऐसे ढेरों फल पैदा होंगे जो भक्तों में प्रसाद के रूप में वितरित किए जाएंगे। रामलला को दुनिया का सबसे अनमोल और महंगा उपहार सबसे पहले भेंट करना एक अत्यंत पावन और अनुकरणीय कार्य है।
जल्द ही बागवानी के क्षेत्र में नई पहचान बनायेगा अयोध्या
किसान भाइयो अब तक यह माना जाता था कि मियाज़ाकी जैसी विदेशी और बेहद नखरेली फसलें केवल नियंत्रित वातावरण या विशिष्ट वैश्विक क्षेत्रों में ही पनप सकती हैं लेकिन अयोध्या के किसान ने इस मिथक को तोड़ दिया है। यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि सही तकनीक और लगन से भारतीय किसान वैश्विक कृषि बाजार में किसी भी बड़े ब्रांड को टक्कर दे सकते हैं।
आने वाले समय में अयोध्या की मिट्टी बागवानी के क्षेत्र में अपनी एक नई पहचान बनाने वाली है। धार्मिक और कृषि के दृष्टिकोण से देखें तो रामलला के चरणों में इस अनूठे फल का अर्पण अयोध्या के बदलते वैश्विक स्वरूप और वहां की आत्मनिर्भर होती कृषि व्यवस्था की एक खूबसूरत झलक पेश करता है।